गणेश चतुर्थी के दिन अपनाए ये तरीके, घर में आएगी खुशी और…

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हम सभी के घर कोई भी शुभ या नया काम शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती हैं। 13 सितम्बर यानि की कल गणेश चतुर्थी है, इसे कलंक चतुर्थी और शिवा चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन गणेश जी की मूर्ति स्थापित की जाती है, कहते है अगर भगवान गणेश की स्थापना शास्त्रों के अनुसार की जाए तो फल अच्छा मिलता है और घर में सुख-सम्रिधि बनी रहती है। भगवान गणेश सब के विघ्न हर लेते है, इसीलिए इन्हें विघ्न हरता भी कहा जाता है।गणेश जी की स्थापना के साथ पूजा और व्रत का भी संकल्प लेना चाहिए। अगर किसी कारण वश कोई गणेश जी की प्रतिमा स्थापित नहीं करना चाहते हैं, तो एक साबुत पूजा सुपारी को गणपति स्वरूप मानकर उसे भी घर में स्थापित कर सकते हैं। आईए जानते है शुभ मुह्रत, भगवान की स्थापना और पूजा विधि….

1 – गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर झाड़ू और पौंछा लगाकर पूरे घर को साफ पानी से धोएं। इसके बाद पूरे घर       में गौमूत्र और गंगाजल का छिड़काव करें।

2 – घर के बाहर रंगोली बनाएं और शुभ मुहूर्त में घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर से शुभ और लाभ लिखें। इसके बाद           गणेश जी की छोटी सी मूर्ति को मुख्य दरवाजे पर उपर की तरफ स्थापित कर के उनकी पूजा करें। मूर्ति की जगह         पूजा की बड़ी सुपारी को गणेश जी मानकर स्थापित कर सकते हैं।

3 – घर में जहां गणेशजी स्थापित करने हों वहां गंगाजल और गौमूत्र छिड़कें। फिर उस जगह बड़ा पटिया, बाजोट या           चौकी स्थापित करें। उस पर लाल कपड़ा बिछाकर गेहूं रखें। उसके पास थोड़े से गेहूं और रखें और उन पर तांबे या         चांदी का एक कलश रखें। इसमें जल भरकर रखें। साथ ही कलश पर लाल रंग की मौली लपेटे और उस पर श्रीफल         रखें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी और घर में समृद्धि आएगी। कलश को मूर्ति के दाईं ओर रखें।

4 – इसके बाद शुभ मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना करें। घर में गणेश जी के आगमन पर शंख बजाएं और मूर्ति पर           गंगाजल डालते रहें और गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करें।

5 – स्थापना के बाद परिवार के सभी लोग हाथ में चावल लेकर गणपति जी का आवहन करते हुए मंत्र बोलें और उनसे         प्रार्थना करें कि वो उन पर अपनी कृपा हमेशा बनाएं रखें। ध्यान करते समय हाथों में पीले पुष्प रखें। प्रार्थना के बाद       फूल को गणपति जी को अर्पित कर दें।

मंत्र – 

गजाननं भूतगणादिसेवितम कपित्थजम्बू फल चारू भक्षणं |
उमासुतम शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम ||
आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरो भव |
यावत्पूजा करिष्यामि तावत्वं सन्निधौ भव ||

6 – अब अपने सीधे हाथ में जल लेकर इस बात का संकल्प लें कि आप गणपति जी को अपने घर में कितने दिनों के           लिए विराजमान कर रहे हैं। वैसे तो गणेश जी को 3, 5, 7, 9 या 11 दिनों के लिए रखना शुभ माना जाता है।

7 –  स्थापना के बाद शुद्ध घी का दीपक और धूप बत्ती जलाएं। दीपक को गणेश जी की मूर्ति के दाईं तरफ रखें।

8 – इसके बाद दूर्वा व पान के पत्ते को गंगाजल में डूबोकर गणपति का स्नान कराएं। इसके बाद गणेश जी को कच्चे         दूध, दही, घी, शक्कर, शहद आदी चीजों से बने पंचामृत से भी स्नान करवाएं। स्नान करवाते समय ऊं गं गणपतयै       नम: मंत्र बोलते जाएं।

9 – इसके बाद उन्हें पीले कपड़े पहनाएं। आप चाहे तो पीले रंग की मौली भी बांध सकते हैं। इसके बाद अक्षत और             कुमकुम का तिलक लगाएं और ओम गं गणपतये नम: मंत्र का 21 बार जाप करें।

10 – इसके बाद गणपति जी को 5 व 21 गांठों की दूर्वा चढ़ाएं। इससे गणपति प्रसन्न होते हैं। इस दौरान आप गणेश           जी की चरणों में पांच हल्दी की गांठ चढ़ाएं। गणपति पूजन के आखिरी दिन हल्दी को अपने घर के पूजा के स्थान         या तिजोरी में रखें। इससे पैसों की कमी नहीं रहेगी और आपके घर में सुख-शांति बनी रहेगी।

11 – फिर गणेश जी को चावल, चंदन, अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी, जनेउ, फूल- माला, इत्र आदी पूजन साम्रगी एक-         एक कर के चढ़ाएं।

12 – इसके बाद गणेश जी को मोदक या लड्डओं का भोग लगाएं। फिर मौसमी फल गणेश जी को चढ़ा दें।

13 – इस तरह नैवेद्य लगाने के बाद गणेश जी को जल का अाचमन करवाएं और उनके हाथ पर जल छिड़कें।

14 – इसके बाद श्रीफल पर अपनी श्रद्धा के अनुसार पैसे रखकर गणेश जी को दक्षिणा चढ़ाएं।

15 – इस तरह पूरी पूजा होने के बाद श्रद्धा से गणपति जी की आरती करें और आरती के बाद प्रसाद बांटें।

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