टूट गया कांग्रेस-जेडीएस का चक्रव्यूह, बीजेपी को मिल गया इन विधायकों का समर्थन?

बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद से सूबे में शुरू हुई राजनीतिक जंग अब अपने आखिरी चरण में पहुंच गई है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल वजुभाई वाला के फैसले को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले बीएस येदियुरप्पा की नवनिर्वाचित सरकार को बहुमत साबित करने के लिए शनिवार शाम चार बजे तक का समय दिया है। इसी बीच एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।

दरअसल, एबीपी न्यूज़ के हवाले से बताया जा रहा है कि कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। भाजपा इन्ही विधायकों के बल पर विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी। भाजपा के संपर्क में रहने वाले इन विधायकों की संख्या 14 बताई जा रही है। हालांकि अभी इनके नाम के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

येदियुरप्पा सरकार के लिए अग्निपरीक्षा मानी जा रही सुप्रीम कोर्ट की चुनौती ने भाजपा के साथ-साथ राजनीतिक समाज में एक खलबली मचा दी है।

सुप्रीम कोर्ट की इस चुनौती के बाद एक ही सवाल लोगों के दिमाग में कूंध रहा है कि क्या भाजपा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विधायकों का बहुमत साबित कर पाएगी या फिर भाजपा को एक भारी किरकिरी का सामना करना पड़ेगा। बहरहाल, अब सभी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए समय के पूरा होने का इन्तजार है। वहीं, भाजपा की नजर पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाली राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर टिकी है।

आपको बता दें कि 222 सीटों पर हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा 104 सीटों पर मिली जीत के साथ सूबे की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है। जबकि कांग्रेस के खाते 77 और जेडीएस के खाते में 37 सीटें गई है। दो सीटों पर अन्य का कब्ज़ा है।

चुनाव नतीजे सामने आने के बाद कांग्रेस ने जेडीएस को अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया था लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था, जिसके बाद पार्टी में येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। राज्यपाल ने येदियुरप्पा सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 14 दिन का समय दिया था।

हालांकि राज्यपाल का यह रवैया कांग्रेस को नागवार गुजरा और उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्यपाल के फैसले को दरकिनार कर दिया है और भाजपा सरकार को बहुमत साबित करने के लिए शनिवार शाम तक का समय दिया है। कर्नाटक विधानसभा में भाजपा के इस अग्निपरीक्षा की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।

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