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पकौड़े बेचने से तो बेहतर है यह बिज़नेस ,GOVERNMENT भी करेगी इसमें मदद

नई दिल्ली : देश में बेरोज़गारी पहले से ही एक बड़ी समस्या थी जिसमे कोरोना ने चार चांद लगा दिए हैं। इसी के मद्देनज़र GOVERNMENT ने लोगों को रोज़गार देने का एक उपाय किया है। नहीं यहाँ बात पकोड़े तलने की नहीं है। असल में पूरा मसला यह है की अगर आप बेरोज़गार हैं और अपना काम शुरू करना चाहते हैं  लेकिन पैसे की कमी अड़चन बन रही है  तो आप प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोल सकते हैं। एक तो इस में कमाई की तगड़ी गुंजाइश है और दूसरा सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग करने को भी तैयार है।

इस स्कीम की शुरुआत मोदी GOVERNMENT ने 2015 में की थी जिसमे सरकार की तरफ से 5 लाख तक की मदद मिलती है । सरकार ऐसा  जेनरिक दवाइयों को प्रमोट करने के लिए कर रही है जो ब्रांडेड दवाइयों से 90 %तक सस्ती होती हैं । पीएम मोदी के हवाले से खबर है की इन जेनेरिक दवाइयों से देश को अबतक 3600 करोड़ की बचत हुई है।

ये होती हैं Generic दवाइयां

असल में जब कोई लैब या साइंटिस्ट कोई नई दवा बनाते है तो उन्हें चौदह साल के लिए उस का पेटेंट मिल जाता है। इन चौदह साल में इस दवा को कोई और नहीं बना सकता। इसी वजह से यह बेहद महंगी होती हैं। लेकिन चौदह साल पूरे होने के बाद कोई भी इन्हें बना सकता है। इन्हीं नॉन पेटेंट दवाइयों को ही जेनरिक दवाई बोलते हैं। जो कीमत में तो कम होती हैं पर असर में नहीं।

जानिए कितनी होगी कमाई

इन सेंटर्स में दवाओं की सेल पर सरकार से 20 %तक कमीशन मिलता है। इस कमीशन के अलावा हर महीने होने वाली सेल पर अलग से 15 फीसदी तक का इंसेंटिव भी दिया जाता है। इस योजना के तहत दुकान खोलने के लिए फर्नीचर और दूसरे सामानों के लिए सरकार की ओर से 1.5 लाख रुपये तक की मदद मिलती है। बिलिंग के लिए कंप्यूटर और प्रिंटर खरीदने में भी सरकार 50,000 रुपये तक की मदद करती है।

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