Corona काल में इस अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही, जानकर हो जाएंगे हैरान

देश में Corona की दूसरी लहर एक बार फिर देश को संपूर्ण lock-down के तरफ लेकर जा रही है।

मुंबई: देश में Corona की दूसरी लहर एक बार फिर देश को संपूर्ण lock-down के तरफ लेकर जा रही है। कोरोना से बचने के लिए राज्य सरकारें अलग-अलग गाइडलाइन जारी कर रही हैं तो वहीं एक तरफ महाराष्ट्र में कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दूसरी तरफ अस्पताल की लापरवाही भी बढ़ रही है। लापरवाही इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है की जीवित कोरोना के मरीज को एक अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं लापरवाही की हदें तब पार हुई जब कोरोना मरीज के परिजनों को अस्पताल द्वारा डेथ सर्टिफिकेट दे दिया गया।

अस्पताल से डेड बॉडी मिलने के बाद परिजनों ने जब उसके चेहरे से कपड़ा हटाया तो उनके होश उड़ गए, क्योंकि बॉडी उनके मरीज की थी ही नहीं। इस तरह की लापरवाही सामने आने के बाद परिजनों में खलबली मच गई और उन्होंने पूरे कोरोना वार्ड का चक्कर लगाया। इस दौरान परिजनों को पता चला कि उनका मरीज बिल्कुल स्वस्थ्य है और वार्ड में ही है।

फोन से बताया गया था

दरअसल काशीनगर में रहने वाली 63 साल की आशा मून पिछले दिनों कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं, जिसके बाद उन्हें नजदीक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि इस दौरान उनके पास किसी भी परिजन को रूकने की इजाजत नहीं दी गई। शनिवार सुबह आशा के परिजनों को अस्पताल से फोन गया कि उनकी मौत हो गई है।

आशा की मौत की खबर सुनने के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे। अस्पताल वालों ने डेथ सर्टीफिकेट भीं सौपा, डेड बॉडी बांधकर शमशान ले जाने की तैयारियां पूरी थीं। इसी बीच परिजनों ने डेड बॉडी कन्फर्म करने के लिए चेहरा दिखाने की मांग की। चेहरा दिखाया गया, तो वो आशा का नहीं था।

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