ये है जन्माष्टमी का सबसे सटीक मुहुर्त, लेकिन भूल से भी न होने पाए ये गलती

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राधा की भक्ति, मुरली की मिठास, माखन का स्वाद और गोपियों का रास, सब मिलके बनाते हैं जन्माष्टमी का दिन खास। जन्माष्टमी का दिन बहुत खास मन जाता है, हर साल यह त्यौहार पुरे देश भर में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है खासकर मथुरा में जो भगवान कृष्ण का जन्म स्थान हैं।

ऐसा कहा जाता है जब-जब धरती पर धर्म का पतन होता है तब-तब भगवान मनुष्य रूप में पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। इसी कड़ी में भाद्रपद की कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी, नक्षत्र में भगवान विष्णु ने कृष्ण रूप में अवतार लिया। इस दिन भगवान पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए इस दिन कृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाता है। अब की जन्माष्टमी का संयोग 2 सितंबर को मनाया जा रहा है, इस दिन सभी भक्त 12 बजे रात्रि तक व्रत रहेंगे।

बांकेबिहारी के जीवन का हर रूप मोहक और प्रेरक है। कंस से दुराचारी के षड्यंत्रों से बचने से लेकर धर्मयुद्ध कुरुक्षेत्र में गीता का पाठ पढ़ाने वाले मुरलीधर की लीलाओं से विश्व सदैव लाभांवित होता आया है। चिरकाल तक होता रहेगा। तो आयिए अब आपको बताए है जन्माष्टमी का उचित समय, नियम और विधि।

यह हैं उचित समय
गोवर्धनधारी का जन्म रोहिणी नक्षत्र में भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में वृष लग्न में हुआ था। इस बार यह संयोग 2 सितंबर रविवार को बन रहा है। इस दिन अष्टमी तिथि रात्रि 8 बजकर 46 मिनट से अगले दिन यानि सोमवार को शाम 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र रविवार को रात्रि 8 बजकर 48 मिनट से सोमवार को 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। इस बीच रविवार को वृष लग्न रात्रि 10 बजे से 11:57 तक रहेगी। इन तीनों के संयोग में ही कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

यह हैं नियम
 जन्माष्टमी के व्रत से पहले रात को हल्का भोजन करें और अगले दिन ब्रह्मचर्य का पूर्ण रूप से       पालन करना चाहिए, ऐसी मान्यता है।
 उपवास के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कार्यों से निवृत होकर भगवान कृष्ण का           ध्यान करना चाहिए।
 भगवान के ध्यान के बाद उनके व्रत का संकल्प लें और पूजा की तैयारी करनी चाहिए।
– इस दिन भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, पाग, नारियल की बनी मिठाई का भोग लगया जाता      है।
– हाथ में जल, फूल, गंध, फल, कुश हाथ में लेकर ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये,       श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥ इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
 रात 12 बजे भगवान का जन्म करें, इसके बाद उनका पंचामृत से अभिषेक करें। उनको नए         कपड़े पहनाएं और उनका श्रृंगार करना चाहिए।
 भगवान का चंदन से तिलक करें और उनका भोग लगाएं। उनके भोग में तुलसी का पत्ता जरूर       डालना चाहिए।
– नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, कहकर कृष्ण को झूला झुलाना चाहिए।
 भगवान कृष्ण की घी के दीपक और धूपबत्ती से आरती उतारें और उनके रातभर मंगल भजन       गाना चाहिए।

ऐसा ना करें
जन्माष्टमी के व्रत रखनेवाले एक दिन पहले से ही सदाचार का पालन करना चाहिए। जो यह व्रत भी नहीं करते हैं उन्हें भी इस दिन लहसुन, प्याज, बैंगन, मांस-मदिर, पान-सुपारी और तंबाकू से परहेज रखना चाहिए। व्रत रखनेवाले मन में भगवान कृष्ण का ध्यान शुरू कर देना चाहिए और कामभाव, भोग विलास से खुद को दूर कर लेना चाहिए। साथ ही मूल, मसूरदाल के सेवन से भी दूर रहना चाहिए। मन में नकारात्मक भाव ना आने दें।

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