ये रेडियो वायस ऑफ खलीफा है

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आईएसआईएस का रेडियो

अफगानिस्तान में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़े आतंकियों ने देश में आतंकी विचार के प्रचार-प्रसार और लड़ाकों की भर्ती के लिए सरकार विरोधी रेडियो स्टेशन शुरू किया है।

पश्तो भाषा में प्रसारण

आईएस द्वारा शुरू इस रेडियो का नाम ‘वायस ऑफ खलीफा’ है। पश्तो भाषा में इसकी प्रसारण सेवा के दायरे में नांगरहार की प्रांतीय राजधानी जलालाबाद और अन्य जिले आ रहे हैं। नांगरहार के जन प्रतिनिधियों और निवासियों ने इसकी पुष्टि की है। फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है कि इसका प्रसारण कहां से हो रहा है।

बंद कराने की कोशिशें

नांगरहार के गवर्नर के प्रवक्ता अताउल्लाह खोगयानी ने कहा कि रेडियो सेवा को बंद करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा, रेडियो सेवा का प्रसारण सीमा पार से हो रहा है। हम बातचीत कर रहे हैं और हो सकता है कि अच्छे नतीजे पर पहुंचे और रेडियो को बंद करा सकें।

islamic_state_flag_624x351_reuters_nocreditयुवाओं से अपील

रविवार को टीओएलओ न्यूज के अनुसार, रेडियो प्रसारण में युवाओं का आह्वान किया जा रहा है कि वे सरकार के खिलाफ उठें और आईएस के सदस्य बनें। एक स्थानीय निवासी ने कहा, सरकार को इस रेडियो को बंद करना चाहिए। इसका सच में युवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। लेकिन, नांगरहार के सूचना एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख अवोरांग सामिम ने कहा कि इस तरह के किसी रेडियो स्टेशन की जानकारी नहीं है।

वैसे ज़्यादातर अफ़गानों की पहुंच इस रेडियो के प्रसारणों तक है, जिस पर ‘ख़िलाफ़त की आवाज़’ की अपील की जाती है. आईएस ने दो हफ़्ते पहले ही रेडियो शुरू किया है। लगता है कि यह रेडियो किसी वाहन में रखकर चलाया जा रहा है ताकि हमलों से बचने के लिए इसकी जगह बार-बार बदली जा सके। मगर घूमते रहने से इस रेडियो प्रसारण की पहुंच इसकी क्षमता से ज़्यादा बड़े इलाक़े तक हो गई है।इस रेडियो के असर के रास्ते में सिग्नल जाम और अफ़गान-पाकिस्तान क्षेत्र का बीहड़ इलाक़ा है जो एफ़एम प्रसारण की दूसरी बड़ी बाधा है।

छवि सुधारने की कोशिश

‘ख़िलाफ़त की आवाज़’ पश्तो भाषा में शाम के समय एक से दो घंटे तक चलता है। इसके दैनिक कार्यक्रम में इंटरव्यू, आईएस का संदेश और जेहादी गीत शामिल होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़ इस प्रसारण के पीछे आईएस की छवि बेहतर बनाने की कोशिश भी है। इस संगठन की क्रूरता और बाक़ी गतिविधियां अफ़गानिस्तान की परंपरा और विश्वासों के ख़िलाफ़ है। जिसकी वजह से हज़ारों लोगों को इलाक़े छोड़कर जाना पड़ा है।

आईएस के एक रेडियो कार्यक्रम के प्रचार में कहा गया है, “अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति के महल और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में काला झंडा फहराया जाएगा।”

कई मोबाइल रेडियो ट्रांसमीटर

संभावना यह भी है कि आईएस के पास कई मोबाइल रेडियो ट्रांसमीटर भी हैं, जो बिना तार के ही सूचना सामग्री साझा करते हैं। अफ़गानिस्तान में कुल 200 से ज़्यादा रेडियो स्टेशन हैं. इनमें से ज़्यादातर अलग-अलग ज़िलों से चलते हैं। तालिबान ने अनियमित तौर पर कई बार दूरदराज़ के इलाक़ों में रेडियो प्रसारण किया है लेकिन लगता है कि पकड़े जाने के डर और लोगों की कम रुचि की वजह से उसने इसे बंद कर दिया है।

‘मुल्लाह रेडियो’

माना जाता है कि स्वात घाटी में पाकिस्तान तालिबान के एक नेता मुल्लाह फ़ज़लुल्लाह अभी भी एक रेडियो सेवा चलाते हैं. इसे ‘मुल्लाह रेडियो’ के नाम से जाना जाता है और इस पर विद्रोही नेताओं के भाषण और संदेश प्रसारित होते हैं। हवाई हमलों के बावजूद रेडियो प्रसारण शुरू करना बताता है कि यहां पांव मज़बूत करने का आईएस का हौसला बुलंद है।

 

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