ग्राहकों के लिए ट्राई का ये नया नियम, थोपे जा रहे हैं अपनी मर्जी के निशुल्क चैनल

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के नए टैरिफ रेगुलेशन ऑर्डर भी ग्राहकों के लिए बेकार साबित हो रहे हैं। नियामक ने 130 रुपये के मासिक शुल्क में फ्री मिलने वाले चैनलों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 200 तो कर दिया है, लेकिन कंपनियां इसमें भी खेल करती हैं और ग्राहकों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता। क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जब तक उपभोक्ताओं को अपनी पसंद के निशुल्क चैनल चुनने की आजादी नहीं मिलेगी, ट्राई का नियम लाभकारी नहीं हो सकेगा।
जाने माने नीति विश्लेषक एवं मीडिया मनोरंजन क्षेत्र के जानकार अश्विनी सिंघला ने कहा कि इस समय देश में 400 से भी ज्यादा फ्री टू एयर (एफटए) या निशुल्क चैनल चल रहे हैं। ट्राई ने अपने नए टैरिफ ऑर्डर में केबल टीवी और डीटीएच ऑपरेटरों को निशुल्क चैनल दिखाने की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दिया है।
लेकिन ग्राहकों को इसका फायदा तब होगा, जब उन्हें यह बताने का अधिकार मिलेगा कि वे कौन से 200 फ्री चैनल चुनना चाहते हैं। मौजूदा समय में वितरक एवं केबल टीवी ऑपरेटर ग्राहकों पर अपने पसंद के चैनल ही थोपते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि केबल ऑपरेटर्स को ब्रॉडकास्टरों से कैरेज एवं प्लेसमेंट शुल्क के लिए ज्यादा पैसे मिलते हैं।
सिंघला का कहना है कि नए आदेश में 200 से ज्यादा निशुल्क चैनल देखने की चाह रखने वाले ग्राहकों को अतिरिक्त पैसे देने का प्रावधान है। ग्राहकों को अला कार्ट के आधार पर चैनल चुनने के लिए अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए। ब्रॉडकास्टर अपने बुके के जरिये उपभोक्ताओं पर अनचाहे चैनलों का बंडल थोपते हैं। यदि ग्राहक चुनने की अपनी स्वतंत्रता का उपयोग नहीं कर सकते हैं, तो उन्हें डीडी फ्री डिश डीटीएच चुनना चाहिए। उन्हें केबल या डीटीएच ऑपरेटरों को 130 रुपये का मासिक बिल भी नहीं देना होगा।

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