IPL
IPL

इस शख्स ने खोला मौत के बाद की दुनिया का राज़, Social Media Users का आया ऐसा रिएक्शन

एक टिकटॉक यूज़र की एक नई थ्योरी (theory) वायरल हो रही है। जिसमें इस व्यक्ति ने अपनी थ्योरी के ज़रिये मौत के बाद होने वाली चीज़ों को लेकर एक लॉजिकल बयान देने की कोशिश की है।

नई दिल्ली : दुनिया का यह दस्तूर है कि जो यहाँ आया है उसे एक न एक दिन जाना ही है। कोई इस दुनिया को जल्दी अलविदा कह जाता है तो कोई अपनी पूरी ज़िन्दगी जी कर हैप्पी एंडिंग (happy ending) करता है। लेकिन इस बात से कोई अनजान नहीं है कि मौत इस दुनिया का सबसे बड़ा सच है। हालांकि मौत के बाद की दुनिया कैसी होती है, इसे लेकर कोई भी अभी तक कुछ नहीं कह पाया है।

ऐसे में एक टिकटॉक यूज़र की एक नई थ्योरी (theory) वायरल हो रही है। जिसमें इस व्यक्ति ने अपनी थ्योरी के ज़रिये मौत के बाद होने वाली चीज़ों को लेकर एक लॉजिकल बयान देने की कोशिश की है। बता दें कि थ्योरी बताने वाले इस शख्स का नाम ब्रैंडन मोनहॉलेन (Brandon Monhollen) है।

क्या है थ्योरी

एक टिकटॉक यूज़र ने इस शख्स से पुछा कि आखिर वो कौनसी थ्योरी है जिसे जानकर आप हैरान रह गए थे? इसके जवाब में ब्रैंडन ने कहा कि इस शख्स ने कहा,”मुझे नहीं पता कि यह थ्योरी सही है या गलत लेकिन मैंने इसे छह महीनों पहले पढ़ा था और मैं इसे शेयर करना चाहता हूं। क्या हो अगर हम मर जाएं और हमें पता चले कि मरने के दौरान जो एक धुंधली सी रोशनी सुरंग में से आ रही होती है, जैसा कि अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता है वो कुछ और नहीं बल्कि किसी अस्पताल की रोशनी हो?”

उन्होंने आगे कहा,”फिर हम अस्पताल में पैदा होते हैं और पैदा होते वक्त आप इसलिए रो रहे होते हैं क्योंकि आपको अपनी पिछली जिंदगी का सब कुछ याद होता है। आपकी मौत हो चुकी है और आपने अपना सब कुछ गंवा कर एक नई शुरूआत की है। जैसे जैसे आप बड़े होते हैं, आप अपनी पिछली जिंदगी को भूल रहे होते हैं और अपनी वर्तमान जिंदगी पर फोकस कर रहे होते हैं।”

यह भी पढ़ें :

क्या है ‘डेज़ा वू’ ?

ब्रैंडन ने ‘डेज़ा वू’ (Deja vu) को लेकर भी अपनी प्रक्रिया व्यक्त की है। ‘डेज़ा वू’ एक फ्रेंच (French) वर्ड है जिसका मतलब होता है ‘पहले भी महसूस किया हुआ’। इसको ऐसे समझा जा सकता है कि अक्सर फिल्मों में ये दिखाया जाता है कि एक्टर-एक्ट्रेस किसी नई या अंजान जगह पर पहुंचकर ऐसा फील करते हैं जैसे वह पहले भी उस जगह पर आ चुके हैं।

ऐसा सिर्फ फिल्मों में ही नहीं बल्कि असल ज़िन्दगी में भी होता है। ब्रैंडन ने कहा कि जैसे जैसे आप अपनी पुरानी जिंदगी भूल रहे होते हैं, वैसे वैसे आपके दिमाग के किसी कोने में कुछ यादें रह जाती हैं और यही मेमोरी ‘डेजा वू’ जैसी फीलिंग्स देती हैं।

Social Media Users का क्या है कहना

जहां इस थ्योरी को सुनकर काफी सोशल मीडिया यूजर्स असंतुष्ट नजर आ रहे हैं तो वहीँ कुछ हैरान भी हैं। सोशल मीडिया पर यह थ्योरी जमकर वायरल हो रही है। वहीँ कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ‘डेज़ा वू’ जैसी कोई चीज़ नहीं होती है। यह महज़ हमरे दिमाग का फितूर है। दरअसल बात सिर्फ इतनी सी है कि जब कोई शार्ट टर्म मेमोरी लॉन्ग तेरम में स्टोर हो जाती है तो ऐसा लगता है कि यह घटना पहले भी हो चुकी है।

 

 

 

Related Articles

Back to top button