नहीं रहे अटल बिहारी वाजपेयी, इस दिग्‍गज नेता को अब तक नहीं गया बताया

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अटल बिहारी वाजपेयीनई दिल्‍ली। भारत रत्‍न और देश के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं हैं। 16 अगस्‍त की शाम को उनका निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी, लेकिन एक ऐसा शख्‍स भी है जिसे अभी तक अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की जानकारी नहीं दी गई है।

दरअसल हम बात कर रहे हैं अटल बिहारी वाजपेयी के पुराने दोस्‍त और सहयोगी रहे जसवंत सिंह की। बता दें कि जसवंत सिंह को अटल बिहारी वाजपेयी का ‘हनुमान’ भी कहा जाता है। अटल जी की सरकार में विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे और राजस्थान के बारमेर जिले के शिव से बीजेपी विधायक मानवेंद्र सिंह ने यह जानकारी सार्वजनिक की है, कि उनके पिता को अटल जी ने निधन की जानकारी नहीं दी गई है।

मानवेंद्र ने एनडीटीवी के लिए लिखे एक ब्‍लॉग के माध्यम से इसकी वजह भी बताई है। उन्होंने कहा है कि विज्ञान के चमत्कार पर उन्हें इतना यकीन नहीं कि वह अपने पिता को अटल जी की मौत की जानकारी देने का जोखिम उठाएं। बता दें कि जसवंत सिंह काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। कुछ समय पहले ब्रेन हेमरेज की वजह से वे कोमा में चले गए थे और तब से डॉक्टरों की निगरानी में हैं।

मानवेंद्र का कहना है कि अगर उन्हें अटल जी की मौत की बात बताई जाए तो वह अपने दोस्त के निधन का शोक महसूस कर सकने की स्थिति में नहीं हैं। यह उनकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। मानवेंद्र सिंह ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि वाजपेयी जी और मेरे पिता की दोस्ती 40 वर्षों से अधिक पुरानी है। मेरे पिता को अटल जी का हनुमान भी कहा जाता है।

उन्‍होंने लिखा कि जिन्ना पर लिखे गए किताब पर विवाद के बाद मेरे पिता जी को बीजेपी से निष्काषित कर दिया गया था। तब एक मात्र व्यक्ति अटल जी थे, जिनसे मेरे पिता ने अपना हाल बयां किया था। अपनी बीमार स्थिति के बावजूद, वाजपेयी जी ने उनकी पीड़ा और निष्कासन के दर्द को समझा था। उन्होंने मेरे पिता जी को कुछ ऐसी बातें कही थी, जिन्हें मैं सार्वजनिक नहीं कर सकता। एक सेहत की वजह से परेशानी में थे और दूसरा किताब पढ़े बिना लगाए गए बेतुके आरोप से। दोनों ने उस समय अपने दर्द को एक-दूसरे से साझा किया।

बता दें कि जसवंत सिंह अटल जी के समय में बीजेपी की पहली लाइन में बैठने वाले नेताओं में से एक थे। अटल जी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे थे। जिन्ना पर उनकी पुस्तक को लेकर विवाद होने पर उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। वर्ष 2014 में राजस्थान के बाडमेर से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया। करीब तीन साल पहले घर में गिर जाने की वजह से उनके सिर में गहरी चोट लग गई थी। इसके बाद से उनकी हालत में सुधार नहीं आया है।

उनके बेटे मानवेंद्र सिंह के अनुसार, वे अब न तो कुछ बोल पाते हैं और न ही कुछ महसूस कर पाते हैं। अटल जी के अंतिम समय की तरह ही उनकी भी हालत हो गई है।

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