चुनाव प्रचार नही होने देता ये गाव फिर भी होती है 90 फीसदी वोटिंग

अहमदाबाद: लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में गुजरात की 26 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान है। मतदान से पहले यहां चुनाव प्रचार थम गया है लेकिन राज्य का एक गांव ऐसा भी है जहां प्रचार होता ही नहीं है। यह गांव है राजकोट जिले का राजसमढियाल गांव। यहां का नियम है कि किसी भी चुनाव में कोई भी नेता यहां प्रचार करने नहीं आ सकता।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यहां लोग चुनाव का बहिष्कार करते हैं बल्कि लोगों का मानना है कि नेताओं के प्रचार से गांव का माहौल खराब होता है। गांव के सरपंच अशोक भाई भी इसकी पुष्टि करते हैं और यही कारण है कि जहां देशभर में चुनावी रैलियां हो रही हैं, इस गांव में कोई चुनावी शोर सुनाई नहीं देता।

राजसमढियाल की इस अनोखी परंपरा की जानकारी देते हुए सरपंच अशोक भाई वाघेला बताते हैं कि जब हरदेव सिंह सरपंच बने तब से ही गांव में नेताओं के चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगा हुआ है। यह सिर्फ सरपंच ने बैन नहीं लगाया बल्कि गांव वाले भी इसके समर्थन में हैं। इसके पीछ बड़ा कारण यह है कि लोगों का मानना है कि गांव में चुनाव प्रचार से यहां का माहौल खराब होगा।

दूसरी तरफ इस गांव की एक खास बात यह भी है कि यहां हर शख्स वोट डालने जाता है क्योंकि यह अनिवार्य है। जो भी 18 साल से ऊपर है उसे वोट डालना ही होता है। अगर ऐसा नहीं होता तो उस शख्स पर जुर्माना लगाया जाता है। गांव में हर चुनाव में मतदान का प्रतिश 95 प्रतिशत तक रहता है।

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