इस महिला ने छोड़ी नर्स की नौकरी, करने लगी लावारिस शवों का अंतिम संस्कार

कोरोना महामारी से देश में लाखों लोगों की जान जा चूकि है तो कई लोग इस बिमारी से संक्रमित है।

नई दिल्ली: कोरोना महामारी से देश में लाखों लोगों की जान जा चूकि है तो कई लोग इस बिमारी से संक्रमित है। ऐसे खराब हालात में भी लोगों के लिए कुछ लोग मिशाल बन चुके हैं। कुछ ऐसा ही किस्सा है मधुस्मिता प्रुस्टी की। जिन्होंने कोरोना काल में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए अपनी नर्स की नौकरी को त्याग दिया है। दरअसल मधुस्मिता और उनके पति भुवनेश्वर में रहते हैं। मधुस्मिता कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल में नर्स की नौकरी करती थीं।

आपको बता दें कि मधुस्मिता के पति भी कोरोना से मर रहें लावारिस शवों के अंतिम संस्कार करते हैं। ऐसे में अपने पति की शवों के अंतिम संस्कार में मदद करने के लिए मधुस्मिता ने फोर्टिस अस्पताल में नर्सिंग की नौकरी को छोड़ दिया। इस बार मधुस्मिता का कहना है कि मैंने 9 सालों तक मरीजों की देखभाल की है। साल 2019 में अपने पति की परित्यक्त शवों का अंतिम संस्कार करने में मदद करने के लिए यहा लौटी थी।

मधुस्मिता ने आगे कहा कि मैंने पिछले 2.5 सालों में 500 शवों और पिछले शाल भुवनेश्वर में 300 से अधिक कोरोना संक्रमण से मरे लोगों के शवों का अंतिम संस्कार किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर एक महिला होने के कारण मुझे आलोचना भी झेलनी पड़ी लेगी पति द्वारा चलाए जा रहे ट्रस्ट के तहत मैंने काम करना जारी रखा।

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