‘दक्षिण का काशी’ के नाम से मशहूर है यह अद्भूत स्थान, Lord Shiva का वास माना जाता है

गोकर्ण दक्षिण भारत के कर्नाटक में मैंगलोर के पास स्थित एक गांव है, इस स्थान से हिन्दू धर्म के लोगों की गहरी आस्थाएं जुड़ी हैं, ऐतिहासिक मंदिरों के साथ सागर तटों के लिए भी यह स्थान मशहूर है

मैंगलोर: गोकर्ण (Gokarna) दक्षिण भारत के कर्नाटक (Karnataka) में मैंगलोर के पास स्थित एक गांव है। इस स्थान से हिन्दू धर्म के लोगों की गहरी आस्थाएं जुड़ी हैं। इसके साथ ही इस धार्मिक जगह के खूबसूरत बीचों के आकर्षण से भी लोग अपने आप ही यहां खिंचे चले आते हैं। अपने ऐतिहासिक मंदिरों के साथ सागर तटों के लिए भी यह स्थान मशहूर है।

खूबसूरत बीच पर्यटकों को लुभाते हैं

यहां माना जाता है कि शिवजी का जन्म गाय के कान से हुआ और इसी वजह से इसे गोकर्ण कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि गंगावली और अघनाशिनी नदियों के संगम पर बसे इस गांव का आकार भी एक कान जैसा ही है। इस कारण से लोगों की यहां काफी आस्था है और यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यहां देखने लायक कई मंदिर हैं। यहां के खूबसूरत बीच ढेरों पर्यटकों को लुभाते हैं। कुल मिलाकर यहां के बेहतरीन प्राकृतिक माहौल में धार्मिक आस्थाओं को गहराई से अनुभव किया जा सकता है।

 

1500 साल पुराना मंदिर

गोकर्ण का महाबलेश्वर मंदिर यहां का सबसे पुराना मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित पश्चिमी घाट पर बसा यह मंदिर 1500 साल पुराना है और कर्नाटक के सात मुक्तिस्थलों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि यहां स्थापित छह फीट ऊंचे शिवलिंग के दर्शन 40 साल में सिर्फ एक बार होते हैं। अपनी इस धार्मिक मान्यता के चलते इस जगह को ‘दक्षिण का काशी’ के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने यह शिवलिंग रावण को उसके साम्राज्य की रक्षा करने के लिए दिया था, लेकिन भगवान गणेश और वरुण देवता ने कुछ चाल चलकर शिवलिंग यहां स्थापित करवा दिया। तमाम कोशिशें करने के बावजूद रावण इसे निकाल नहीं पाया। तभी से यहां भगवान शिव का वास माना जाता है।

गोकर्ण का एक और महत्त्वपूर्ण मंदिर महागणपति मंदिर है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। गणेश जी ने यहां शिवलिंग की स्थापना करवाई थी, इसलिए यह उनके नाम पर इस मंदिर का निर्माण करवाया गया है।

 

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