हीरो बनने मुंबई गए 3 बच्चे… और पैसे पड़ गए कम

juhu_beach07झांसी। हीरो बनने की चाहत में कक्षा 10 और 5 में पढ़ने वाले तीन मासूम बच्चे मायानगरी मुंबई पहुंच गए। वहां उन्होंने जमकर मौज-मस्ती की। पैसे कम पड़े तो घर पर फोन कर दिया। सुराग मिलने पर पुलिस टीम उन्हें मुंबई से सकुशल वापस ले आई।

इस बात का खुलासा एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने सोमवार को पत्रकारों के समक्ष किया। उन्होंने  बताया कि 31 दिसंबर, 2015 को राकेश गुप्ता निवासी चमनगंज सीपरी बाजार ने थाने पर आकर सूचना दी कि उसका भतीजा मयंक गुप्ता पुत्र राजेंद्र गुप्ता अपने साथी अभिषेक मिश्रा पृथ्वीराज राजपूत उर्फ प्रेम के साथ 30 दिसंबर को शाम पांच बजे कहीं गया और फिर वापस नहीं आया।

किया गया टीमों का गठन

पुलिस ने सूचना के आधार पर धारा 363 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुबे ने बताया कि गुमशुदा बच्चों के प्रकरण की संवेदनशीलता देखते हुए सीओ सदर सोमेन वर्मा, स्वाट टीम प्रभारी विक्रम सिंह एवं सीपरी बाजार थानाध्यक्ष कामता प्रसाद के नेतृत्व में तीन टीमों का गठन किया गया।

उन्होंने बताया कि बच्चों की तलाश में उनके परिजनों से बता करके व टीएसजी के सहयोग से सुराग ली गई। इसी क्रम में गुमशुदा बच्चों में से एक ने अपने परिजनों को बताया कि वे लोग अंधेरी मुंबई में क्लासी बार के पास हैं और सकुशल हैं। जानकारी होने पर पुलिस टीम को मुंबई रवाना किया गया और वहां से बच्चों को झांसी लाया गया।

बनने गए थे हीरो

मीडिया के समक्ष बरामद किए गए तीनों बच्चों ने बताया कि वे मुंबई हीरो बनने गए थे। यह योजना उन्होंने 26 दिसंबर को बनाई थी। इसमें उनके दो दोस्त और शामिल थे। लेकिन दोनों ने उनके साथ जाने से इंकार कर दिया था। इसलिए अंतिम समय में उन्होंने अभिषेक को इस योजना में शामिल कर लिया और तीनों लोग कुल 600 रुपये लेकर मुंबई चले गए।

वे पहले पुणे-लखनऊ एक्सप्रेस से भोपाल गए और वहां से इंदौर। फिर एक बस से मालेगांव पहुंचे। वहां एक ट्रक चालक ने उनकी मदद की और अंधेरी तक छोड़ दिया। वहां रुपये कम पड़ गए तो मयंक ने अपने परिजनों को फोन कर दिया। यहां से परिजनों ने उसके अकाउंट में एक हजार रुपये डाले, जिसे मयंक ने एटीएम से मुंबई में निकाल लिए। बच्चों ने बताया कि वे मुंबई में फिल्मों में काम करने के मकसद से गए थे। उन्होंने जुहू चौपाटी पर नहाया, खेला और खूब मौज-मस्ती की।

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