TMC और BJP ने जारी किया मेनिफेस्टो, जानिए दोनों में क्या है खास ?

भाजपा ने बंगाल से इतने वादे किए कि शायद ही किसी पार्टी ने किए होंगे वही ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के मेनिफेस्टर को भी जारी किया गया।

बंगाल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 को देखते हुए कल रविवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपना मेनिफेस्टो जारी किया गया अपने इस मेनिफेस्टो में भाजपा ने बंगाल से इतने वादे किए कि शायद ही किसी पार्टी ने किए होंगे वही ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के मेनिफेस्टर को भी जारी किया गया। जिसमें बंगाल के विकास को लेकर वादें किये गए है।

भाजपा के बड़े-बड़े वादों को देखते हुए ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी भाजपा के जवाब में बड़े-बड़े वादों की झड़ी लगा दी है। और इन दोनों ने अपने अपने मेनिफेस्टो में बंगाल की जनता को लुभाने की पूरी कोशिश की है। यह वादे इसलिए किए गए हैं क्योंकि इन्हीं वादों की बदौलत इन दोनों पार्टियों में से निकाल के जनता इन्हें सत्ता में लाएगी। जनता को इसके महत्व को जानना और समझना जरूरी है।

BJP Manifesto vs Tmc Manifesto: TMC और BJP के मेनिफेस्टो में क्या है खास, यहां जानें अंतर

भाजपा और टीएमसी का मेनिफेस्टो

  • ममता बनर्जी ने विधवा पेंशन के लिए 1000 रुपये देने का वादा किया है तो वहीँ भाजपा ने 3000 रूपये देने का वादा किया है।
  •  ममता और भाजपा दोनों ने ही छोटे किसानों को 10,000 रुपये सालाना देने का ऐलान किया है।
  • बनर्जी मां कैंटीन चला रही हैं, तो वहीँ भाजपा अन्नपूर्णा कैंटीन चलाएगी।
  • ममता बनर्जी ने OBC की श्रेणी में आने वाले तामुल तिलि, शाहा और महेश को आरक्षण देने का वादा किया है।
  • ममता बनर्जी ने दलित, आदिवासी और ओबीसी परिवार को सालाना 12 हजार रुपये देने का वादा किया है।
  • भाजपा ने पिछडे और दलित छात्राओं को 3-5 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद देने का वादा किया है।
  • भाजपा का वादा छात्राओं को देंगे मुफ्त शिक्षा, टीएमसी छात्रों को क्रेडिट कार्ड देगी।
  • ममता बनर्जी ने 25 लाख रुपये घर बनाने तथा हर घर साफ पानी पहुंचाने का वादा किया है।
  • भाजपा ने सोनार बांग्ला फंड बनाने का ऐलान किया है, जो 11 हजार करोड़ का होगा।

मेनिफेस्टो 17 मार्च को जारी किया

अगर बात करें ममता बनर्जी की तो उन्होंने अपना मेनिफेस्टो 17 मार्च को जारी किया था वहीं भाजपा ने अपने मैनिफेस्टो को रविवार को जारी किया है। तो इस तरह यह दोनों पार्टियां आम जनता को रिझाने की कोशिश में लगी हुई है। कोण कितना सफल हो पता है इसका पता चुनाव के नतीजे आने के बाद ही चल पायेगा।

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