इस गांव में कॉल करने के लिए चढ़ना पड़ता है पेड़ पर,जानिए राज

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भारत में हर गांव में सुख सुविधा उपलब्ध हो गई है। लेकिन आज भी ऐसे कई गांव है जहा पर रात में लाइट नहीं आती है। आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे है जहां पर वर्तमान समय का कुछ भी नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हम बात कर रहे है.बिहार के कैमूर जिले के जिला मुख्यालय भभुआ से 65 किलो मीटर दूर अधौरा प्रखंड के पहाड़ पर बसा है बड़वान कला गांव। इस गांव की आबादी करीब 5 हजार के आस पास है। हैरान कर देने वाली बात है कि आधुनिक समय में भी यहां पर कोई मोबाइल नेटवर्क नही है इतना ही नहीं सड़क औऱ गांव के लोगों की प्याय बुझाने के लिए पानी भी न हीं है।

सबसे बड़ी बात है कि 21 सदी से भारत में भी इस गांव तक आज भी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई है। अगर यहं पर कोई बीमार होता है तो लोग  उसे बांस की लकड़ी में बांधकर अपने कंधे पर टांगकर 8 किमी पैदल पहाड़ियों से नीचे लाते हैं।फिर वहां से उन्हें जिला मुख्यालय भभुआ आने की गाड़ी मिलती है।

गांव के लोगों ने बताया कि 100 में 90 लोग जिनकी तबियत बहुत ज्यादा खराब होती है जिला मुख्यालय पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। गांव में एक भी ऐसा नहीं है जो इलाज के बारे में कुछ जानता है।गांव में एक भी मुलभुत सुविधा उपलब्ध नहीं है फिर भी गांव के लोग अपना गुजारा कर रहे है।

अगर गांव में किसी ने मेहनत करके फोन खरीद लिया तो उसके लिए दो किलोमीटर तक पैदल चलकर जाना पड़ता है तब जाकर फोन में नेटवर्क आता है।  पूरे गांव में सिर्फ एक ही कुआं है और यह कुआं पूरे गांव की प्यास भुझाने के काम आता है। गर्मियों के दिनों में लोग 3 से 4 कोस पैदल चलकर दूसरे गांव से पानी लाते हैं।

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