Chaitra Navratri का आज पांचवा दिन, मां दुर्गा के पांचवे सरूप में इनकी होगी पूजा, देखें विधि

लखनऊ: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का पर्व मां दुर्गा को समर्पित है। नवरात्रि के पर्व में मां दुर्गा के 9 अलग अलग स्वरूपों की पूजा होती है। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के आज पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप में स्कंदमाता की पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार आज 17 अप्रैल शनिवार को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है।

देवी दुर्गा का यह पांचवा स्वरूप मातृत्व को परिभाषित करता है। इनकी चार भुजाएं हैं, इनकी दाहिनी तरफ की ऊपर वाली भुजा में भगवान स्कंद गोद में हैं और दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपरी भुजा वरमुद्रा में और नीचे वाली भुजा में भी कमल हैं। स्कंदमाता का वाहन शेर है और ये कमल के आसन पर भी विराजमान होती हैं इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहते है।

आज इस विधि विधान से करें पूजन

आज देवी स्कंदमाता की पूजा करने के लिए तस्वीर या मूर्ति वहां पर स्थापित करें जहां पर कलश स्थापना की हुई है। फिर उन्हें फल और फूल चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाएं। मान्यता है कि पंचोपचार विधि से देवी स्कंदमाता की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके बाद की पूरी प्रक्रिया ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा और बाकी देवियों की जैसी ही है।

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ये लगाएं भोग:

मां को केले का भोग लगाएं। इसे प्रसाद के रूप में दान करें। मां को पूज के दौरान 6 इलायची भी चढ़ाई जाती हैं।

स्कंदमाता का मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

स्कंदमाता की आरती:

जय तेरी हो स्कंद माता।

पांचवा नाम तुम्हारा आता।।

सब के मन की जानन हारी।

जग जननी सब की महतारी।।

मुझे एक है तेरा सहारा।।

कही पहाड़ो पर हैं डेरा।

कई शहरों में तेरा बसेरा।।

हर मंदिर में तेरे नजारे।

गुण गाये तेरे भगत प्यारे।।

भगति अपनी मुझे दिला दो।

शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।।

इंद्र आदी देवता मिल सारे।

करे पुकार तुम्हारे द्वारे।।

दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आएं।

तुम ही खंडा हाथ उठाएं।।

दासो को सदा बचाने आई।

‘चमन’ की आस पुजाने आई।।

 

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