नवरात्रि का आज प्रथम दिन, मां शैलपुत्री की पूजा की देखें विधि, इन मंत्रों का करें जाप

लखनऊः मां दुर्गा की उपासना का पर्व नवरात्रि आज यानी 07 अक्टूबर से नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो रही है। नवरात्रि का पर्व 9 दिनों तक बड़े ही धूम- धाम से मनाय जाता है। शारदीय नवरात्रि 14 अक्टूबर को समाप्त होंगे, इसके अगले दिन यानी 15 अक्टूबर को दशहरा या विजयादशमी का त्योहार मनाया जाएगा।

नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। मां शैलपुत्री सौभाग्य की देवी हैं। उनकी पूजा करने से सुख की प्राप्ति होती हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा। माता शैलपुत्री का जन्म शैल या पत्थर से हुआ, इसलिए इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता आती है। उपनिषदों में मां को हेमवती भी कहा गया है।

पूजा-विधि

सुबह उठकर जल्दी स्नान कर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें।
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना भी की जाती है।
पूजा घर में कलश स्थापना के स्थान पर दीपक जलाएं।
अब मां दुर्गा को अर्घ्य दें।
मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं।
धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें।
मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। इस दिन मां को सफेद वस्त्र या सफेद फूल अर्पित करें।
मां को सफेद बर्फी का भोग लगाएं।

मां शैलपुत्री की आरती

शैलपुत्री मां बैल सवार। करें देवता जय जयकार।

शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी।

पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने उतारी।

उसकी सगरी आस जा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।

घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।

श्रृद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित शीश झुकाएं।

जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद चकोरी अंबे।

मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

मंत्र

वन्दे वांछितलाभाय, चंद्रार्धकृतशेखराम।

वृषारूढ़ां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम।।

 

 

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