#HBDayAtal : अटल के गांव से दौड़ पड़ी ट्रेन

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आगरा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 91वें जन्‍मदिन (25 दिसंबर) से एक दिन पहले उनके गांव बटेश्‍वर से पहली बार ट्रेन दौड़ी।

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गुरुवार को आगरा-इटावा डीएमयू पैसेंजर ट्रेन को रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रेल परियोजना की नींव 1999 में अटल जी ने बतौर प्रधानमंत्री रखी थी। इस मौके पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया भी मौजूद थे। दोनों ने प्‍लेटफॉर्म टिकट लेकर स्‍टेशन में प्रवेश किया और ट्रेन में भी बैठे।

आगरा-इटावा डीएमयू पैसेंजर ट्रेन 114 किलोमीटर लंबी आगरा–बटेश्‍वर–इटावा रेल लाइन पर चलेगी। 12 साल पहले वाजपेयी ने खुद इस रेल लाइन का शिलान्‍यास किया था।

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ये होगा रूट

इटावा से सुबह 5.55 बजे
उदी स्‍टेशन : 6.15 बजे
जैतपुर हॉल्‍ट : 6.32 बजे
मानसिंह का पुरा हॉल्‍ट : 6.52 बजे
जैतपुर कलां हॉल्‍ट : 7.06 बजे
बाह स्‍टेशन : 7.22 बजे
बटेश्वर हॉल्‍ट : 7.37 बजे
भदरौली : 7.50 बजे
मानिकपुरा : 8.05 बजे
फतेहाबाद : 8.27 बजे
धिमिश्री : 8.46 बजे
शमसाबाद : 8.58 बजे
भांडई : 9.31 बजे
आगरा : 10.00 बजे

इससे पहले आगरा रेल मंडल के डीआरएम प्रभात कुमार ने इस रूट पर ट्रेन का ट्रायल भी किया था। वे आगरा से बटेश्‍वर और इटावा तक का सफर करके इस रूट पर रेल यात्रा शुरू करने की तैयारी का जायजा ले चुके हैं।

अटल के गांव से ट्रेन चलने पर उनके भतीजे रमेश चंद्र वाजपेयी ने कहा था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही उन्‍हें भरोसा हुआ था कि यह काम पूरा हो जाएगा।

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अटल बिहारी वाजपेयी के दादा पंडित श्याम लाल वाजपेयी मूल रूप से आगरा के बटेश्वर के रहने वाले थे। लेकिन वे मध्य प्रदेश के ग्वालियर आकर बस गए थे। अटल का जन्म ग्वालियर में ही हुआ था।

2004 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के सत्‍ता से बाहर होने के बाद आगरा-बटेश्वर-इटावा रूट पर ट्रेन चलाने का प्रोजेक्ट पर कुछ सालों तक खास काम नहीं हुआ था।

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वर्ष 2007 में इसके लिए फंड दिया गया। तब से इस पर धीरे-धीरे काम चल रहा था।शुरुआत में भूमि अधिग्रहण की अड़चनों की वजह से काम रुक गया था। लेकिन आखिरकार मोदी सरकार ने इस ट्रेन को ट्रैक पर दौड़ा ही दिया।

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