केंद्र के विकास को जबरदस्त झटका, मनरेगा के नाम पर लाखों गटक गईं पंचायतें

देहरादून। केंद्र सरकार की मनरेगा योजना को यहां जमकर पलीता लगाया जा रहा है। साथ ही ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर लिए गए सरकारी पैसों को हजम करने का भी काम किया गया। इस मामले का खुलासा मनरेगा के सोशल आडिट से हुआ।

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केंद्र सरकार की मनरेगा

आडिट की रिपोर्ट में इस बात का साफ़ जिक्र किया गया कि जिन कामों के नाम पर पंचायतों को पैसा मुहैया कराया गया। यहां विकास के नाम पर सिर्फ ठगी का कारोबार हुआ। काम तो हुआ ही नहीं।

खबरों के मुताबिक़ पंचायतों ने बिना काम कराए ही हजारों रुपये का भुगतान कर दिया। बिलों में निर्माण कार्यों के लिए सीमेंट, रेत, बजरी, सरिया क्रय को दर्शाया गया। लेकिन कार्यों का भौतिक सत्यापन करने पर न तो सीमेंट लगा है और न ही सरिया। निर्माण सामग्री के नाम पर मनरेगा के पैसे का गोलमाल किया गया। मनरेगा के सोशल आडिट में इसका खुलासा हुआ है।

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उत्तराखंड सामाजिक अंकेक्षण जवाबदेही एवं पारदर्शिता अभिकरण की ओर से रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़ जिले की 39 ग्राम पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट केंद्र व प्रदेश सरकार को सौंप दी गई है।

वहीं अपर सचिव राम बिलास यादव ने कहा- ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों की सोशल ऑडिट रिपोर्ट मिली है। जिसे आगामी कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी गई है। प्रदेश की सभी पंचायतों में मनरेगा का आडिट कराया जा रहा है। अब तक 206 पंचायतों में ऑडिट हो चुका है।

बता दें सरकार की ओर से पहली बार मनरेगा कार्यों का आडिट कराने से ग्राम पंचायतों में बड़ी वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

उत्तराखंड सामाजिक अंकेक्षण जवाबदेही एवं पारदर्शिता अभिकरण (उसाटा) ने अप्रैल व मई माह में उत्तरकाशी जिले के नौगांव, रुद्रप्रयाग के जखोली, पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा, पिथौरागढ़ के धारचूला विकासखंड की 39 पंचायतों में मनरेगा कार्यों का सोशल आडिट किया।

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नौगांव ब्लाक के पौंटी पंचायत में आठ शौचालय निर्माण के लिए मनरेगा से 96 हजार रुपये का भुगतान किया गया। भौतिक सत्यापन में एक भी शौचालय नहीं मिला।

इसके साथ ही तीन कार्ययोजना में सुरक्षा दीवार के लिए माप पुस्तिका में 9.5 लाख रुपये का दर्शाया गया। लेकिन आडिट टीम को मौके पर कोई काम नहीं मिला।

नैनीडांडा के भौन पंचायत में गौशाला व बकरी बाड़ा बनाने के लिए 125 सीमेंट बैग के साथ रेत, सरिया का क्रय दर्शाया गया। जबकि गौशाला व बकरी बाड़ा में सीमेंट व सरिया का प्रयोग नहीं हुआ। कागजों में निर्माण सामग्री क्रय कर हजारों रुपये का गोलमाल सामने आया है।

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कई पंचायतों में मनरेगा कार्यों के बिलों को ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी के हस्ताक्षर बिना ही स्वीकृत किया गया। मस्टरोल में फ्ल्यूड लगाकर ओवर राइटिंग की गई। मनरेगा कार्यों के रिकॉर्ड में भी बड़ी गड़बड़ी पाई गई।

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