भिखारी ठाकुर जयन्ती पर श्रद्धार्पण समारोह, भोजपुरी की 7 विभूतियां सम्मानित

लखनऊ: ‘‘नारी की दशा पर जितना उम्दा लेखन भोजपुरी के भिखारी और बांग्ला के शरतचन्द ने किया उसकी मिशाल मुश्किल है। शेक्सपियर के लेखन में मनोरंजन तो है पर क्रान्ति नहीं। यद्यपि बर्तोल ब्रेख्त की रचनायें क्रान्तिधर्मी हैं किन्तु भिखारी के आगे किसी की एक नहीं चलती। उन्होंने न केवल सामाजिक विसंगतियों पर करारा प्रहार किया बल्कि लोक को शिक्षित व जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। भिखारी भोजपुरी लोक ही नहीं भारतीय लोक चेतना के प्रखर प्रवक्ता की भूमिका निभाई।’

ये बातें अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास द्वारा आयोजित भिखारी ठाकुर जयन्ती पर वक्ताओं ने कहीं। शुक्रवार को प्रेस कलब में आयोजित कार्यक्रम में भिखारी ठाकुर अध्ययन एवं शोध पीठ बनाने, भोजपुरी अकादमी के निर्माण की बातें भी जोर-शोर से उठीं। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रविशंकर खरे, अहमदाबाद विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. सुधीर पांडेय, वरिष्ठ साहित्यकार दयानंद पांडेय, वरिष्ठ लोक गायिका आरती पांडेय, संगीत नाटक अकादमी के सदस्य राकेश श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कई हस्तियों को किया गया सम्मानित

इस अवसर पर डॉ. शरदमणि त्रिपाठी को गुरु गोरखनाथ सुर योगी सम्मान, गोरखपुर के राकेश श्रीवास्तव को भिखारी ठाकुर लोक संगीत साधक सम्मान, नर्द दिल्ली के केशव मोहन पांडेय को आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी लोक भाषा सौहार्द सम्मान, गोरखपुर के कनक हरि अग्रवाल को बाबा राघव दास शिक्षा उन्नायक सम्मान, गोरखपुर के शिवेन्द्र पांडेय को सीताराम केडिया स्मृति लोक सेवा सम्मान, मऊ के शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव को श्रीकांत पांडेय स्मृति लोक मनीषी सम्मान, बलिया के सुशील चन्द श्रीवास्तव को भोलानाथ गहमरी साहित्य सेवा सम्मान और विनोद तिवारी, संजय सिंह, उमाकांत मिश्र, रामविलास यादव और पुनीत निगम को भोजपुरी मीत सम्मान प्रदान किया गया।

भिखारी की रचनाधर्मिता को युग सापेक्ष बताया

भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रविशंकर खरे ने भिखारी ठाकुर के सांगीतिक नाट्य प्रस्तुति की कार्यशाला कराने और मुख्यमंत्री से मिलकर भोजपुरी अकादमी की स्थापना विषयक लम्बित पत्रावली के निस्तारण हेतु अनुरोध करने का आश्वासन दिया। दयानंद पांडेय ने भिखारी की रचनाधर्मिता को युग सापेक्ष बताया। भिखारी ठाकुर पर शोध कार्य करने वाले अहमदाबाद विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. सुधीर पांडेय ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। राकेश श्रीवास्तव ने भिखारी की प्रसिद्ध बिदेशिया रचना का सस्वर गायन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में लोक गायिका अंजलि सिंह ने भजन से की। संचालन अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी सेवा न्यास के महासचिव एस.के. गोपाल और आभार ज्ञापन न्यास के अध्यक्ष परमानंद पांडेय ने किया। कार्यक्रम के दौरान लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा गत दिनों डा. शरद मणि त्रिपाठी के निर्देशन में हुई आनलाइन भक्ति संगीत कार्यशाला राम धरत शरीर के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

कर्यक्रम में न्यास के उपाध्यक्ष दिग्विजय मिश्र, संयुक्त सचिव राधेश्याम पांडेय, मिथिला मंच के अध्यक्ष जितेन्द्र झा, दशरथ महतो, गयानाथ यादव, डा. संगीता शुक्ला, सीमा अग्रवाल, दिव्यांशी मिश्रा, शिप्रा मिश्रा, रश्मि उपाध्याय, शालिनी सिंह, ज्योति किरन रतन, मधु श्रीवास्तव, अम्बुज अग्रवाल, अमर श्रीवास्तव, सौरभ कमल, गौरव गुप्ता, जादूगर सुरेश आदि प्रमुख रुप से मौजूद रहे।

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