जौनपुर में काकोरी काण्ड के तीन महानायकों को दी गई श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश: जौनपुर के कलेक्ट्रेट में स्थित क्रांति स्तम्भ पर आज हिन्दुस्तान समाजवादी कार्यकर्ता की फौज व लक्ष्मी बाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने काकोरी काण्ड के तीन महानायकों को श्रद्धांजलि दी।

काकोरी काण्ड के तीन महानायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान व रोशन सिंह का 93 वां बलिदान दिवस मनाया। कार्यकर्ताओं ने क्रांति स्तम्भ पर मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाई और दो मिनट का मौन रखकर आजादी के लड़ाई के पुरोधा एवं काकोरी काण्ड के महानायकों को श्रद्धांजलि दी।

क्रांति स्तम्भ पर मौजूद लोगों को सम्बोधित करते हुए लक्ष्मी बाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई के समय चार महान क्रान्तिकारियो राजेंद्र नाथ लाहिणी, पंडित राम प्रसाद विस्मिल, अशफाक उल्लाह खान और ठाकुर रोशन सिंह ने भारत के खजाना को लेकर जा रही ट्रेन को लखनऊ के काकोरी में 09 अगस्त 1925 में लूटकर हुकूमतों को ललकारा और 6065 रूपये किसान मजदूरों का है कहते हुए अंग्रेजों को नहीं ले जाने दिया । अंग्रेजों ने इन चारों को गिरफ्तार किया और इन तीनों देश के सपूतों को फांसी दे दी गई।

राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर, ठाकुर रोशन सिंह को केन्द्रीय कारागार नैनी और अशफाक उल्लाह खान को फैजाबाद जेल में 19 दिसम्बर 1927 को फांसी दी गई थी। उन्होंने कहा कि इस काण्ड के महानायक राजेन्द्र नाथ लहिड़ी को दो दिन पूर्व यानी 17 दिसम्बर 1927 गोण्डा जेल में फांसी दी गई थी। काकोरी कांड के मुकदमे की सुनवाई लखनऊ के मुख्य डाकघर में हुई थी। जिसमें अंग्रेजों के वकील जगत नारायण मुल्ला थे। मुल्ला मोतीलाल नेहरू के दोस्त थे।

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