लोकसभा में पास हुआ तीन तलाक बिल, अब राज्यसभा में होगी चर्चा

नई दिल्ली। पिछले काफी समय से देश में चर्चा का विषय बना हुआ तीन तलाक बिल गुरूवार को लोकसभा में पास हो गया। यह बिल तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा को रोकने के मकसद से लाया गया है। लोकसभा में पांच घंटे तक चली चर्चा के बाद लोकसभा में पास हो पाया। इस विधेयक के पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े।

इस बिल के लिए वोटिंग के दौरान कांग्रेस, एआईएडीएमके, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने वॉक आउट कर दिया। संसद के निचले सदन में केंद्र सरकार के पास स्पष्ट बहुमत होने के चलते यह तय माना जा रहा था कि यह बिल लोकसभा में पास हो जाएगा। लेकिन विपक्षी दलों समेत अहम मुद्दों पर केंद्र का साथ देने वाली एआईएडीएमके का वॉक आउट करना यह संकेत दे गया कि यह विधेयक राज्यसभा में एक बार फिर अटक सकता है।

आपको बताते चले कि पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को असंवैधानिक करार देते हुए सरकार को कानून बनाने को कहा था, जिसके बाद सरकार ने दिसंबर, 2017 में लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक लोकसभा से पारित कराया, लेकिन अब यह बिल राज्यसभा में अटक गया है। इसके पीछे का कारण यह है कि उच्च सदन सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है।

इस बिल को लेकर विपक्ष मांग कर रहा था कि तीन तलाक में जमानत का भी प्रावधान होना चाहिए, जिसके बाद अगस्त में इस विधेयक में संशोधन किया गया, लेकिन इस बार विधेयक राज्यसभा में अटक गया। इसके बाद सितंबर में सरकार अध्यादेश लेकर आई। चूंकि, अध्यादेश की अवधि 6 महीने होती है लिहाजा यह बिल एक बार फिर संशोधन के साथ लोकसभा में लाया गाया। अब सरकार के सामने सबसे बड़ा टेस्ट राज्यसभा में है क्योंकि उच्च सदन में अभी भी सरकार के पास विधेयक को पास कराने के लिए संख्या बल नहीं है।

यह बिल जब पिछली बार राज्यसभा में आया था तो इसे कुछ संशोधन के साथ सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया था। आपको बताते चले कि इस विधेयक का कांग्रेस ने समर्थन किया था लेकिन उसकी मांग थी कि बिल में कुछ अहम संशोधन किए जाएं, लेकिन इस  बार कांग्रेस जब दोबारा बिल लोकसभा में आया तो कांग्रेस इसे असंवैधानिक बताते हुए वॉक आउट कर गई।

राज्यसभा में फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 86 सांसद हैं, जिसमें बीजेपी के 73, जेडीयू के 6, शिवसेना के 3, अकाली दल के 3 और आरपीआई के 1 सांसद शामिल हैं। वहीं विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस के 50, समाजवादी पार्टी के 13, टीएमसी के 13, सीपीएम के 5, एनसीपी के 4, एनसीपी के 4, बीएसपी के 4, सीपीआई के 2 और पीडीपी के 2 सांसद शामिल हैं। इस विपक्ष के पास 97 सांसद हैं।

जबकि राज्यसभा में वो दल जो किसी खेमे में नहीं है और हालात देखकर अपना रुख तय करते हैं उनमें टीआरएस के 6, बीजेडी के 9 और एआईएडीएमके के 13 सांसद हैं। अब लोकसभा से वॉकआउट करने के बाद सरकार के समक्ष सवाल खड़ा हो गया कि उच्च सदन में एआईएडीएमके का क्या रुख रहेगा।

लोकसभा से वॉकआउट करने वाले सांसदों की मांग थी कि बिल पर विस्तृत चर्चा के लिए दोनों सदनों की संयुक्त सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। इन दलों का सवाल है कि तीन तलाक को अपराध क्यों माना जाए? साथ ही जिस व्यक्ति को इस अपराध में सजा मिलनी है उसके परिवार का ध्यान क्यों नहीं रखा गया।

अब समस्या यह है कि मौजूदा संसद सत्र 8 जनवरी तक ही चलना है और अगर इस बार भी बिल राज्यसभा में अटक जाता है तो सरकार को दोबारा अध्यादेश लाना पड़ेगा। चूंकि, यह अंतिम सत्र है लिहाजा नई सरकार और नई संसद के समक्ष ही इस बिल को दोबारा लाया जा सकेगा।

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