दूरसंचार टावरों में तोडफोड़ से इतने करोड़ मोबाइल यूजर्स को हुई परेशानी

आम लोगों का मानना है कि राजनीतिक नफे नुकसान से सरकारी या निजी संपत्ति के नुकसान से किसी को कोई फायदा नहीं पहुंचता।

नई दिल्ली: तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन के दौरान दूरसंचार टावरों में बड़ी संख्या में तोड़फोड़ से संपर्क सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है और करीब डेढ़ करोड़ उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं। कोरोना (Corona) के संकट में घर से पढ़ाई कर रहे छात्र और वर्क टू होम पेशेवर सबसे अधिक कठिनाई में हैं।

उग्र हो रहा है किसानों का आंदोलन

किसानों के प्रदर्शन का आज 35वां दिन है। और आज किसान और सरकार के बीच सांचवें दौर की बात होगी। इन सबके बीच हर गुजरते दिन के साथ आंदोलन के उग्र होने का प्रभाव नजर आने लगा है। पहले रेल और सड़कें रोकी जा रही थीं। लेकिन अब धीरे-धीरे तोड़फोड़ की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं।

तोड़फोड़ से चरमराई व्यवस्था

पंजाब में आंदोलन के नाम पर रिलायंस जियो के 2000 के करीब मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाया गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह (Captain Amarendra Singh) की अपील और चेतवानी भी खास असर नहीं डाल पाई है। मंगलवार को सेलुलर आपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COIA) ने भी टावरों में तोड़फोड़ से संपर्क व्यवस्था के चरमरा जाने की आशंका और चिंता जताई है।

अंबानी और अडानी पर फूट रहा गुस्सा

किसान आंदोलन समर्थकों का सबसे ज्यादा गुस्सा रिलायंस जियो के टावरों पर नजर आ रहा है। क्योंकि उन्हें अंदेशा है कि नए कृषि कानूनों का सबसे अधिक लाभ मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) और अडानी (Adani) की कंपनियों को ही मिलेगा। हालांकि न तो अंबानी का रिलायंस समूह और न ही अडानी की कंपनियां किसानों से अनाज खरीदने के कारोबार में हैं। इसके अलावा बाबा रामदेव की पतांजलि के उत्पादों की भी आवाज उठने लगी है।

CM की चेतावनी दिखी बेअसर

मुख्यमंत्री कैप्टन सिंह की चेतावनी और किसान संगठनों की अपीलें बेसर साबित हुई हैं। एयरटेल, वोडा-आइडिया और रिलायंस जियो जैसी टेलीकॉम कंपनियों की साझा एसोसियेशन सीओएआई और टावर कंपनियों के संगठन, टावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर एसोसिएशन (TAIPA) भी पंजाब में टावर को नुकसान न पहुंचाने की अपील कर चुके हैं। मुख्यमंत्री की सख्त कार्यवाही की चेतावनी देने के बावजूद तोड़फोड़ जारी है।

तोड़फोड़ पर आम लोगों की राय

वहीं आम लोगों का मानना है कि राजनीतिक नफे नुकसान से सरकारी या निजी संपत्ति के नुकसान से किसी को कोई फायदा नहीं पहुंचता। मोबाइल टावरों की विद्युत आपूर्ति काटना सूबे की जीवन रेखा को शिथिल करने जैसा है। बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं से महरूम हैं। कोविड में जो लोग घर से काम कर रहे थे यानी वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे। उन्हें भी खतरे में धकेल दिया गया है। ऑनलाइन बिजनेस से जुड़े युवाओं के धंधे मंदे हो गए हैं।

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