ट्रंप ने किम को चेताया, सैटेलाइट की आड़ में परमाणु परीक्षण की तैयारी में उत्तर कोरिया?

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नई दिल्ली:अमेरिका की ओर से कई कोशिशों के बावजूद दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. आप को बता दे की वियतनाम में हुई हनोई शिखर वार्ता के नाकाम रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यदि उत्तर कोरिया ने एक सेटेलाइट साइट का नए सिरे से निर्माण किया.  तो उन्हें उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग से बहुत निराशा होंगी. बता दें कि उत्तर कोरियाई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के योंगब्योन प्लांट में नई गतिविधियों का पता चला है. इसके बाद से ही तनाव बढ़ा है.

इस प्लांट में उत्तर कोरिया की पहली इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का उत्पादन होता रहा है. बताया जाता है कि इस मिसाइल की जद में अमेरिका तक आता है.

ट्रंप ने दी चेतावनी

ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने हाल ही में चेतावनी दी है अगर वो अपना परमाणु कार्यक्रम पर लगाम नहीं लगाते तो मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप की राय इस बारे में बहुत स्पष्ट है

उत्तर कोरिया को ऐसे प्रतिबन्धों से राहत नहीं मिलने वाली है, इनसे उनकी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी. इतना ही नहीं, हम उन पर और नए प्रतिबंध लगाने के बारे में भी विचार करेंगे.

तनाव के पीछे की कहानी

दक्षिण कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस द्वारा बताया गया कि उन्होंने उत्तर कोरियाई मिसाइल प्लांट में गतिविधियों को देखा.

यह भी कहा गया कि उत्तर कोरिया ने जून, 2018 में सिंगापुर में ट्रम्प और किम जोंग उन के बीच पहले शिखर सम्मेलन के बाद भी मुख्य योंगब्योन परमाणु परिसर में अपनी यूरेनियम संवर्धन जारी रखा.

ट्रम्प और किम के बीच एक- दूसरे शिखर सम्मेलन के बाद पिछले हफ्ते हनोई की वियतनाम की राजधानी में इस बात को लेकर मतभेद सामने आए थे.

क्यों खतरनाक हैं ये मिसाइल

उत्तर कोरिया के सैनमुंडोंग कारखाने ने ह्वासोंग -15 आईसीबीएम, उत्तर कोरिया की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल का उत्पादन किया जो 13,000 किमी (8,080 मील) से अधिक की उड़ान भर सकती हैं.

इस मिसाइल की जद में अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया के मुख्य शहर आते हैँ.  ये अब तक की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल है.

क्या मुमकिन है परमाणु हथियारों पर रोक लगाना.

बता दें कि पिछ्ले सम्मेलन में ट्रंप और किम की मुलाकात में बातें जितनी उम्मीद थी उसके मुताबिक आगे नहीं बढ़ीं. उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों को मुक्त करने का कोई ठोस नतीजा नहीं दिखाया था.

जबकि उत्तर कोरिया इस बात से निराश है कि अमेरिका उत्तर कोरिया पर लगी पाबंदियों में छूट देने को तैयार नहीं है. इसके बावजूद दोनों पक्षों की ओर से इस बार जो संकेत मिले हैं,

उससे ट्रंप और किम की मुलाकात के दौरान कुछ कदम उठाए जाने को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं.

अमेरिका में नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक डैन कोट्स ने सीनेट की एक कमेटी को बताया कि उत्तर कोरिया के नेता का अपने शासन को बनाए रखने के लिए परमाणु हथियार बेहद जरूरी मानते हैं,

खासकर उस वक्त में जब अमेरिका उनकी सत्ता को उखाड़ फेंकने की कोशिश करता.

 

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