इस दिन नहीं तोड़ना चाहिए Tulsi का पत्ता, जानें क्यों और इससे संबंधित पांच विशेष बातें

तुलसी (Tulsi) के पौधे का जितना धार्मिक महत्व है, उतना ही औषधीय महत्व भी है। लोगो का मानना है ये पौधा जिस घर में होता है यह सुख-समृद्धि प्रदान करती है।

लखनऊ: तुलसी (Tulsi) के पौधे का जितना धार्मिक महत्व है, उतना ही औषधीय महत्व भी है। लोगो का मानना है ये पौधा जिस घर में होता है यह सुख-समृद्धि प्रदान करती है। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी यानी भगवान विष्णु की प्रियतमा के रूप में इनको पुजा जाता है। इसलिए खासकर भगवान विष्णु व कृष्ण पूजन इसके बिना संपूर्ण नहीं माना जाता। वेद-पुराणों में तुलसीदल की विशेष महिमा बताई गई है।

Tulsi नही होती कभी बासी

आपको बता दें, तुलसी कभी बासी नहीं मानी जाती, न ही ये किसी चीज से अपवित्र होती है। तुलसी की मंजीर को तुलसीदल कहते है। वेद पुराणों के अंतर्गत तुलसी के पौधे को रविवार और मंगलवार को नहीं तोड़ना चाहिए। एकार्दशी के दिन तुलसी के पत्तो को तोड़ना पूर्ण रूप से वर्जित होता है। क्योकी इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का खास दिन होता है। आइएं जानते है तुलसी संबंधित कुछ खास बातें

Tulsi का पौधा
Tulsi का पौधा

तुलसी संबंधित कुछ खास बातें

  1. भगवान गणेश को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।
  2. तुलसी के पौधे और पत्तियों को बिना स्नान नहीं छूना चाहिए और न ही तोड़ना चाहिए।
  3. तुलसी के पत्ते हमेशा उंगलियों के पोरों से तोड़ने चाहिए। नाखून के प्रयोग से नहीं।
  4. तुलसी का पौधा सूख गया हो तो उसे फेंकना नहीं चाहिए बल्कि नदी में प्रवाहित कर देने चाहिए। या जमीन में दबा देना चाहिए।
  5. सूर्य संक्रान्ति, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण के समय पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए।
  6. शाम के समय में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

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