पारिवारिक कलह के बीच अधर में झूल रही दो मासूम जिंदगी, हटा मां-बाप का साया

काशीपुर। यहां एक ही परिवार के हर सदस्यों की ज़हर खाने के बाद मौत हो गई। सभी की मौत के बाद अब इस परिवार में केवल दो लोग ही जीवित रह गए हैं। वो है दो बच्चे। एक लड़का रुद्रप्रताप और दूसरी उससे दो साल छोटी बहन। ऐसी मुश्किल घड़ी में रुद्र को यह नहीं समझ आ रहा है कि वह खुद को संभाले या अपनी छोटी बहन को। ऐसे में जो उनके पारिपारिक और रिश्तेदार हैं उन्होंने ने भी उनका साथ देने से इंकार कर दिया ऐसे में गैर लोगों ने आगे बढ़कर इन बच्चों का हाथ थामा।

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ज़हर खाने के बाद मौत

खबरों के मुताबिक़ रायबरेली के लालगंज में मृतक अंशुमान के चाचा-चाची, चेचरे भाई, भतीजों समेत पूरा कुनबा है।

वहीं जिला बाल कल्याण समिति की चेयरमैन डॉ। रजनीश बतरा ने भी ग्राम हरियावाला पहुंचकर सरिता के बच्चों को हाल चाल जाना। उन्होंने बच्चों से बात भी की।

डॉ। बतरा ने बताया कि यदि बच्चों के परिवार के लोग उन्हें साथ नहीं ले जाते है तो दोनों बच्चों को बाल संरक्षण गृह भिजवा दिया जाएगा।

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इधर जसपुर विधायक आदेश चौहान व कांग्रेसी नेता संदीप सहगल ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर बच्चे से मुलाकात की।

बता दें बच्चों के पिता योगेंद्र प्रताप वर्ष 2009 तक कानपुर में राशन का कोटा चलाते थे। उनकी मौत के बाद कोटा अंशुमान के नाम आया, लेकिन खाद्यान्न वितरण में धांधली की शिकायत पर पांच माह बाद ही उसका कोटा निरस्त कर दिया गया।

इधर संपत्ति विवाद के चलते उसकी अपने चाचा के परिजनों से रंजिश बढ़ गई। वे अंशुमान का नाम तक सुनना पसंद नहीं करते थे।

कुंडा पुलिस ने अपने स्तर से पता लगाकर उन्हें इस मनहूस घटना के बारे में जानकारी दी तो उन्होंने मूक प्रतिक्रिया दी। दो टूक उन्होंने आने से इनकार कर दिया।

उधर, सूचना पर मृतक का साला रवि सिंह व साढ़ू मोनू सिंह समेत चार लोग टैक्सी से काशीपुर आने के लिए चल चुके हैं। उनके जल्द ही काशीपुर पहुंचने की संभावना है।

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दरअसल रवि सिंह के पास यहां आने के लिए पैसे तक नहीं थे, यह बात पता चलने पर हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारियों ने टैक्सी कराने में उनकी मदद की।

रवि ने बताया कि जीजा, बहन और भांजियों का काशीपुर में अंतिम संस्कार कराने के बाद वह भांजे रुद्रप्रताप व भांजी आर्या को अपने साथ ले जाएंगे।

ग्राम प्रधान राजकुमार ने बताया कि गांव वालों ने मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए सारी तैयारियां कर ली थी।

अखबार में खबर पढ़कर कुछ लोगों ने फोन कर उन्हें बुलाया और अंतिम संस्कार के लिए गुप्त दान दिया।

तीन लोगों ने इस काम के लिए सत्रह हजार रुपये की राशि दी। करीब साढ़े नौ हजार रुपये ग्रामीणों ने आपस में एकत्र किए।

उन्होंने कहा कि मृतक के साले के पहुंचने के बाद सोमवार को गंगेबाबा रोड स्थित शमशानघाट पर चारों शवों की अंतेष्टि कर दी जाएगी।

10 साल की मासूम आर्या को नहीं पता कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। मां के बगैर उसे पहली बार रात अपने मकान मालिक के पहलू में गुजारनी पड़ी।

मां का जिक्र सुनते ही वह फफक पड़ती है। दो साल बड़ा भाई उसे किसी तरह ढाढ़स बंधाता है। स्कूल जाने के सवाल पर कहती है कि हां मैं पढ़ना चाहती हूं, मां मुझे डॉक्टर बनाना चाहती थी, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे।

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