पिछड़ी जाति के स्वतंत्रदेव सिंह को मिली यू पी बीजेपी की कमान

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उत्तर प्रदेश: पिछड़ी जाति से सम्बन्ध रखने वाले स्वतंत्र देव सिंह को यूपी में बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही इन्हें लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था. जहां छिंदवाड़ा को छोड़ कर पार्टी सभी सीटें जीतने में कामयाब रही. ये भाजपा से प्रभार के परिवहन राज्य मंत्री भी हैं. उनकी छवि संगठन में एक मज़बूत नेता की रही है.सूत्रों के अनुसार केशव प्रसाद मौर्य के बाद वे पिछड़ी जाति के दूसरे प्रदेश अध्यक्ष हैं. महेन्द्र नाथ पांडे के केन्द्रीय मंत्री बन जाने के बाद से ही नये प्रदेश अध्यक्ष की खोज हो रही थी. स्वतंत्र देव सिंह इससे पहले भी दो बार यूपी अध्यक्ष बनते बनते रह गए थे.

2014 के लोकसभा चुनाव में स्वतंत्र देव सिंह का अहम रोल रहा था. यूपी में नरेन्द्र मोदी का चुनावी रैलियां आयोजित करने की ज़िम्मेदारी भी उन्हें ही दी गई थी. ये काम उन्होंने बख़ूबी किया. जहां भी रैली होती थी, वे हफ़्ते भर पहले वहीं पहुंच जाया करते थे. उन दिनों वे प्रदेश बीजेपी के महामंत्री हुआ करते थे.
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2004 में ही वे बुंदेलखंड से विधान परिषद का चुनाव जीत कर एमएलसी बने. तब वे पहली बार बीजेपी के प्रदेश महामंत्री बनाए गए. 2010 में उन्हें यूपी बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया था. 2017 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड की सभी सीटें बीजेपी जीत गई. इसका श्रेय स्वतंत्र देव को भी मिला. इसीलिए सरकार बनने पर वे मंत्री बने. पटेल बिरादरी के स्वतंत्र देव सिंह ने राजनीति की शुरूआत छात्र संघ चुनाव से की थी. उन्होंने जालौन के डीवीसी कॉलेज से छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा. लेकिन वे हार गए. उसके बाद 1986 में वे आरएसएस से जुड़ गए.

सुरुआत से नहीं थे नेता माध्यम वर्गीय थे स्वतंत्र देव सिंह

एवीबीपी में संगठन मंत्री के रूप में काम किया. 1998 में वे बीजेपी के प्रदेश युवा मोर्चा को महामंत्री बनाए गए. 2001 में उन्हें युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. 2012 में स्वतंत्र देव सिंह कालपी से विधानसभा का चुनाव लड़े लेकिन क़िस्मत ने साथ नहीं दिया.उनकी ज़मानत तक नहीं बची. वैसे वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे.

स्वतंत्र देव सिंह का जन्म 13 फ़रवरी 1964 को यूपी के मिर्ज़ापुर जिले में हुआ था. इनकी मां का नाम रामा देवी और पिता का नाम अल्लर सिंह था. स्वतंत्र देव की शादी झांसी में हुई. उनकी कोई राजनैतिक पृष्ठभूमि नहीं रही. वे ग़रीब परिवार से थे. उनके बड़े भाई की पुलिस में नौकरी लग गई. जिनकी तैनाती जालौन में हुई. तो स्वतंत्र देव सिंह का परिवार मिर्ज़ापुर से जालौन पहुंच गया.

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