शाह को 2019 से ठीक पहले आई उद्धव की याद, लेकिन नहीं बनी बात

नई दिल्ली। बीते दिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। दोनों पक्षों के तल्ख रिश्तों के बीच चल रही इस मुलाकात को काफी महत्व दिया जा रहा है। कहा जा रहा है आगामी चुनाव को लेकर अमित शाह ने कमर कसनी शुरु कर दी है। दोनों के बीच हुई इस मुलाकात ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस मीटिंग के बाद कहा जा रहा है 2019 में बीजेपी से बगावत कर चुकी शिवसेना एकबार फिर से एनडीए के साथ चुनाव लड़ने के लिए मन बना रही है। बात करें शिवसेना की तो वह बीजेपी के सबसे पुरानी आक्रामक आलोचक पार्टी मानी जाती है।

गिले-शिकवे दूर करते हुए दोनों नेताओं की मुलाकात उद्धव ठाकरे के मुंबई स्थित घर में हुई। कल शाम करीब पौने आठ बजे अमित शाह जब मातोश्री पहुंचे तो उद्धव ठाकरे ने पूरे परिवार के साथ उनका स्वागत किया। जिसके बाद ठाकरे के घर मेंं बने महाराष्ट्रीयन को खाने पर अमित शाह ने उनके परिवार का साथ दिया। करीब एक घंटे तक चली इस बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बाहर इंतज़ार किया।

खबरों की माने तो उद्धव ने महाराष्ट्र के बीजेपी नेतृत्व पर अपनी नाराजगी अमित शाह के सामने जाहिर की। इसके अलावा उद्धव ने कैबिनेट के विस्तार नहीं होने और एनडीए की को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक नहीं होने का भी मुद्दा उठाया। जिसके बाद अमित शाह ने उन्हें सारी शिकायतों को दूर करने का दिलासा दिया है। हालांकि, उद्धव ठाकरे ने आगामा 2019 में होने वाले चुनाव में साथ देने का पूरी तरह से खुलासा नहीं किया है, लेकिन मुलाकात के अगले ही दिन शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि हम 2019 में अकेले ही चुनाव लड़ेंगे।

साथ ही उन्होंने कहा है कि वह अमित शाह के एजेंडा को मानते हैं लेकिन शिवसेना ने पहले ही तय कर लिया है कि वह 2019 में होने वाले चुनाव में अकेली ही लड़ेगी। जिसमें हम किसी भी तरह का बदलाव नहीं करना चाहते हैं।

नेताओं की बयानबाजी से नाराज़ उद्धव ठाकरे-
इस मीटिंग की नौबत तब आई जब पता चला कि बीजेपी के स्थानीय नेताओं की बयानबाजी से उद्धव ठाकरे नाराज हैं। पालघर उप-चुनाव के दौरान बीजेपी नेताओं ने तल्ख बयानबाजी की थी। शिवसेना इस बात से भी नाराज है कि अहम सहयोगी होने के बावजूद उसकी अनदेखी होती है। इनके अलावा महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट विस्तार नहीं होने से भी शिवसेना नाराज है। साथ ही बीजेपी को अब शिवसेना का साथ भी चाहिए।

बीजेपी और शिवसेना का रिश्ता बहुत पुराना-
दोनों के रिश्तों के बारे में कहा जाता है कि बीजेपी और शिवसेना का रिश्ता बहुत पुराना है। जब बाल ठाकरे जिंदा थे तब ऐसा सोचा भी नहीं गया था कि दोनों पार्टी कभी एकदूसरे के समक्ष खड़ी हो जाएंगी, लेकिन बाल ठाकरे के निधन के बाद शिवसेना ने उसी पार्टी का साथ खो दिया था जिसके साथ उसका गठबंधन बहुत समय से चला आ रहा था।

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