कश्मीर को लेकर यूएन ने जारी की ऐसी रिपोर्ट, भड़क उठा भारत…लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्‍ली। जम्मू-कश्मीर को लेकर यूनाइटेड नेशंस (यूएन) द्वारा पेश की गई रिपोर्ट भारत को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई है। भारत ने यूएन की इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए झूठा करार दिया है। भारत का कहना है कि यूएन की ये रिपोर्ट गलत मंशा से प्रेरित है। इस रिपोर्ट में यूएन ने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्‍मीर (पीओके) का भी जिक्र किया है। यूएन का कहना है कि वहां भी मानवाधिकार का हनन किया जा रहा है। इसके अलावा रिपोर्ट में विवादित तौर पर भारत से कहा गया है कि कश्‍मीर की लोगों की इच्‍छा का सम्‍मान किया जाए।

दरअसल यूएन की यह रिपोर्ट पाकिस्तान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर लगातार किये जा रहे सीजफायर के उल्लंघन को लेकर जारी की गई है। मानवाधिकार संस्‍था के प्रमुख जैद राद अल हुसैन ने जुलाई 2016 से कश्‍मीर में हुई हत्‍याओं की जांच की मांग की है। साथ ही उन्‍होंने कहा है कि यहां पर सुरक्षाबलों के अत्‍यधिक प्रयोग और पैलेट गन का नागरिकों पर प्रयोग होने की भी जांच की जानी चाहिए। उन्‍होंने मांग की कि कश्‍मीर में भीड़ नियंत्रित करने वाले इस तरीके पर रोक लगनी चाहिए। यह पहला मौका है जब यूएन की ओर से कश्‍मीर पर इस तरह की कोई रिपोर्ट आई है।

हुसैन ने कहा कि वह ह्यूमन राइट्स कांउसिल से मांग करेंगे कि कश्‍मीर में मानवाधिकार हनन के आरोपों की जांच के लिए एक कमीशन ऑफ इन्‍क्‍वॉयरी (सीओआई) हो। काउंसिल का सेशन अगले हफ्ते से शुरू होगा। क्‍या होती है यूएन की सीओआई यूएन में सीओआई उच्‍च स्‍तर की जांच प्रक्रिया होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएन के मुखिया ने भारत और पाकिस्‍तान दोनों के प्रतिनिधियों से जुलाई 2016 में हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद मुलाकात की थी। यूएन ने पीओके में हो रहे मानवाधिकार हनन पर कहा कि यहां पर लगातार मानवाधिकार का उल्‍लंघन हो रहा है। लेकिन साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह अलग तरह का मानवाधिकार हनन है।

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