यूपी में युवती की मौत का खुला गहरा राज नाले में मिला शव पुलिस ने की लापरवाही 

उत्तर पदेश: लखनऊ के हजरतगंज में तीन दिन से लापता लड़की की मौत के मामले में पुलिस पूरी तरह से शक के घेरे में हैं। घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पुलिस ने इस मामले में बड़ी लापरवाही की। आशंका यह भी है कि पुलिस को युवती से दरिंदगी और उसकी हत्या के बारे में पता था और पुलिस सिर्फ साक्ष्य मिटने का इंतजार कर रही थी।

पोस्टमार्टम करने वाली टीम को युवती के शरीर से ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला, जिससे उसके साथ दरिंदगी की पुष्टि हो सके। विशेषज्ञों का कहना है कि तीन दिन तक शव के पानी में रहने की वजह से दरिंदगी के सभी साक्ष्य मिट गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से युवती की मौत उसकी गुमशुदगी वाली रात यानी 31 मार्च को या एक अप्रैल की सुबह हो चुकी थी।पुलिस का कहना है कि एक अप्रैल की रात को युवती के परिवारीजन थाने पहुंचे और गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई। अगले दिन दो अप्रैल को पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि युवती डीजीपी मुख्यालय के पास लोहिया पथ के नीचे नाले के किनारे बने शिव मंदिर के आसपास देखी गई थी।
नरही चौकी प्रभारी भूपेंद्र सिंह के साथ पुलिस टीम दो अप्रैल की सुबह ही शिव मंदिर पहुंची तो वहां उसका मोबाइल फोन व डायरी मिल गई। जाहिर है कि पुलिस टीम ने युवती की तलाश में आसपास का पूरा इलाका खंगाला होगा। हालांकि, उस वक्त पुलिस को युवती का शव मिला न ही कपड़े। पुलिस तीन अप्रैल की सुबह फिर से शिव मंदिर पहुंची तो पास ही युवती के कपड़े मिल गए। इस बार भी निश्चत रूप से पुलिस ने युवती का शव आसपास खोजा लेकिन सफलता नहीं मिली। यह अलग बात है कि दो दिन तक छानबीन के बाद भी जो शव पुलिस को नही दिखा, वह उसी दिन शाम को नरही निवासी विजय पाल उर्फ छोटू को शिव मंदिर से 50 मीटर दूर नाले में नजर आ गया।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया..

पुलिस की यही कार्यप्रणाली संदेह पैदा कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक अगर युवती की मौत 31 मार्च की रात या एक अप्रैल की सुबह हो चुकी थी तो उसका मोबाइल फोन, डायरी और कपड़े तीनों चीजें पुलिस को दो अप्रैल को एक साथ मिल जानी चाहिए थीं। जबकि तीनों चीजें दो बार में मिली।इससे यह आशंका जताई जा रही है कि युवती से दरिंदगी और उसकी हत्या के बाद किसी ने मोबाइल फोन और डायरी मंदिर में फेंक दिया। हत्यारा युवती के कपड़े फेंकना भूल गया होगा, इसलिए उसने दूसरे दिन उसी जगह पर आकर कपड़े फेंके। यह भी हो सकता है कि शिव मंदिर से युवती का मोबाइल फोन और डायरी मिलने के बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और आसपास के इलाके की ठीक से छानबीन नहीं की। अगर ऐसा हुआ होता तो शायद युवती के कपड़े और शव दो अप्रैल को ही मिल जाते।

दरिंदगी की आशंका के चलते मामला दबाने की कोशिश तो नहीं
एक आशंका यह भी है कि पुलिस को युवती का शव नाले में दो अप्रैल को ही मिल गया होगा लेकिन दरिंदगी की आशंका के चलते पुलिस उसे दबाने की कोशिश में जुट गई। पुलिस जानती थी कि अगर शव दो-तीन दिन पानी में रहा तो दरिंदगी के साक्ष्य नष्ट हो जाएंगे। शायद इसी वजह से पुलिस ने शव को तीसरे दिन खुद बरामद न करके किसी राहगीर के जरिए बरामद कराया।

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