कम डिमांड के कारण देश में बेरोजगारी बढ़ी

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में लाखों लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई है। भारत भी इससे कहीं अछूता नहीं रहा है। कम डिमांड के कारण देश में लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं।

लॉकडाउन ने बढ़ाई बेरोजगारी

देश में बढ़ते कोरोना केसों को लेकर सरकार ने लॉकडाउन तो लगा दिया था। लेकिन इसका अंजाम इतना बुरा होगा शायद ये नहीं सोचा था। देश में करोड़ों की संख्या लोग बेरोजगार हो जाएंगे इसका अंदाजा भी नहीं लगाया था।

लॉकडाउन के बाद भी नहीं मिल रहा रोजगार

लॉकडाउन में बाजार तो खुल गए है, लेकिन नौकरियां अब भी नहीं मिल पा रही हैं। आलम यह है कि दुकानों पर ग्राहकों से ज्यादा काम मांगने वाले लोग पहुंच रहे हैं। वहीं इसपर व्यापारियों का कहना है कि बाजार खुलने के बाद भी कई सेक्टर में काम कम हो रहा है। यही हालात रहे तो कर्मचारियों की संख्या में और कमी करनी पड़ेगी।

जुलाई के मुकाबले अगस्त में रोजगार घटा

कोरोना महामारी से पहली तिमाही में देश की GDP ग्रोथ में 23.9 फीसदी की गिरावट आई है।  जो अच्छे संकेत नहीं दे रही है। हालांकि तमाम रिपोर्ट में आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे सुधरने का अनुमान भी लगाया गया है। वहीं अगर बात करे बेरोजगारी तो जून के मुकाबले जुलाई में शहरी और ग्रामीण दोनों ही बेरोजगारी दरों में मामूली गिरावट दर्ज की गई थी। जुलाई में शहरी बेरोजगारी दर घटकर 9.15 फीसदी रह गई थी, जो जून में 12.02 प्रतिशत थी। जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर जून में 10.52 प्रतिशत से घट कर जुलाई में 6.66 प्रतिशत रह गई थी।

सरकारी नौकिरियों में पदों को किया जा रहा कम

सरकार की तरफ से अब दिन-प्रतिदिन सरकारी नौकरियों में भी मौके कम किए जा रहे हैं। यही नहीं, सरकार की तरफ से पदों को भी कम कर दिया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पीएम मोदी ने जब रविवार को ‘मन की बात’ की तो उसको लाइक करने वालों से कहीं ज्यादा संख्या डिसलाइक करने वालों की रही। ऐसा कहा जा रहा है कि डिसलाइक करने वालों में बेरोजगारी की मार झेल रहे अधिकतर युवा ही हैं।

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