प्यार की निशानी कहे जाने वाले ताजमहल की अनसुनी और अनकही बातें

आगरा:दुनिया में सात अजूबे मने जाते है जिनमे से एक ताजमहल भी है। सभी अजूबों में सुमार आगरा के ताजमहल के साथ हजारों किस्से जुड़े हैं। कुछ सच्चे हैं, तो कुछ झूठे भी। बता दें कि इतिहासकार राज किशोर राजे ने इन किस्सों पर लंबा अध्ययन किया है। जिसमे एक किस्सा यह भी है जिसमे कहा गया है कि ताजमहल बन जाने के बाद शाहजहां ने इसे बनाने वाले मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे।

इतिहासकार राज किशोर हाथ कटवाने वाले किस्से को झूठ बताते हैं। वो कहते हैं कि शाहजहां ने कारीगरों से आजीवन काम न करने का वादा लिया था। इसे ही दूसरे शब्दों में हाथ कटना कहा गया। इसके साथ ही मजदूरों के लिए अलग बस्ती बनाई गई।

कई किस्से और कहानियों में काले ताजमहल का जिक्र हुआ है लेकिन इसके कोई सबूत नहीं मिले है बता दें कि एक फ्रेंच यात्री टवर्नियर ने काले ताज की कहानी पेश की। इसके पश्चात् वर्ष 1871 में कलाईल ने इसे प्रचारित किया। 1910 से गाइडों ने कहानी को हकीकत बताकर सैलानियों को सुनाना शुरु कर दिया।

इसके साथ ही इतिहासकार राजे कहते हैं कि शाहजहांकालीन किसी पुस्तक में काले ताजमहल का जिक्र नहीं है। यह कोरी कहानी है, जिसके साक्ष्य नहीं। एएसआई की खोदाई में साफ हो चुका है कि जिसे काला ताजमहल की नींव बताया गया, वह मेहताब बाग का ही हिस्सा है।

राजे शर्मा बताते हैं कि ताज के मुख्य गुंबद पर 466 किलो सोने का ठोस कलश लगा था। यह तीन फुट छह इंच लंबा था। इसे अंग्रेजों ने 1810 में बदलवा दिया। अब पीतल का कलश लगा है। एक रोचक बात यह है कि ताजमहल, कुतुबमीनार से भी ऊँचा है। कुतुबमीनार 72.5 मीटर ऊंची है जबकि ताज 73 मीटर।

ताजमहल में मकराना के संगमरमर से तामीर किए गए ताजमहल में 49 तरह के पत्थरों का उपयोग किया गया। दुनिया की सबसे बेहतरीन पच्चीकारी का नमूना ताजमहल में ही है।  टोपाज, पुखराज, पिट्यूनिया, मेगनेट स्टोन, गुलाबी, गोल्डन स्टोन (तिलाई), एमरेल्ड पत्थर लगाए गए थे। देश के अलावा विदेश में रूस, मिश्र, श्रीलंका, अरब, इराक, चीन से नगीने मंगाए गए।

इतिहासकार राज किशोर राजे बताते हैं कि ताजमहल पर खर्च के सम्बन्ध में कोई जिक्र नहीं मिला है। ताजमहल की कीमत किसी ने 90 करोड़ बताया, तो किसी ने 132 करोड़ बतायी है।

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