बनारस में स्ट्रॉबेरी (Strawberry) की अनोखी खेती, Roll Model बने युवा

रमेश मिश्रा और उनके मित्र मदन मोहन ने बनारस के डाफी में स्थित गांव की जमीन पर स्ट्रॉबेरी (Strawberry) की खेती शुरू की है जिसका बाजार में भाव 300 रुपए किलो है

वाराणसी: काशी की पावन धरती पर 2 युवाओं ने दी बनारस को नई पहचान। रमेश मिश्रा और उनके मित्र मदन मोहन ने बनारस के डाफी में स्थित गांव की जमीन पर स्ट्रॉबेरी (Strawberry) की खेती शुरू की है। उस खेती से उपजे स्ट्रॉबेरी का बाजार में भाव 300 रूपए किलो है। युवाओं के इस पहल से उन्हें रोजगार मिलने के साथ-साथ उन्हें एक अलग पहचान मिली है।

स्ट्रॉबेरी की खेती

कोरोना काल में नौकरी छूटने के बाद रमेश मिश्रा और मदन मोहन दोनों ने मिलकर बनारस के डाफी में स्थित गांव में लीज पर 1 एकड़ की जमीन ली। उस जमीन पर उन्होंने स्ट्रॉबेरी (Strawberry) की खेती करना शुरू किया। उनकी कठिन मेहनत रंग लाई अब उनकी मेहनत से उगाई गई स्ट्रॉबेरी बाजार में 300 रूपए के दाम पर बिक रही हैं। रमेश मिश्रा ने बताया कि उन्हें पहले स्ट्रॉबेरी की खेती कैसे करते हैं उसके बारे में नहीं पता था। तब उन्होंने पुणे में रह रहे अपने मित्र से फोन करके पूछा कि स्ट्रॉबेरी (Strawberry) की खेती कैसे कि जाती है। उसके बाद ही दोनों युवाओं ने मिलकर स्ट्राबेरी की खेती करना शुरू किया।

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Strawberr का उपयोग

स्ट्रॉबेरी फ़्रागार्या (Frgyya) जाति का एक पेड़ होता है, जिसके फल के लिये इसकी विश्वव्यापी खेती की जाती है। इसके फल को भी इसी नाम से जाना जाता है। स्ट्रॉबेरी की खास सुगंध इसकी पहचान बन गयी है। ये चटक लाल रंग की होती है। इसे ताजा भी, फल के रूप में खाया जाता है, साथ ही इसे संरक्षित कर जैम, रस, आइसक्रीम, मिल्क-शेक आदि के रूप में भी इसका सेवन किया जाता है।

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