विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता का मतलब मनमानी नहीं: आनंदीबेन

उन्होंने कहा कि सभी कुलपति विश्वविद्यालय में नियमित रूप से बैठें तथा छात्र-छात्राओं से नियमित रूप से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान निकालें. छात्रों के बीच कुलपति को अपनी ऐसी आभा बनानी चाहिए

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का मतलब मनमानी कतई नहीं समझा जाना चाहिये.

पटेल ने गुरूवार को प्रदेश के कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों एवं पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय की समस्याओं के संबंध में हुई बैठक में कहा कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कुलपति एवं शासन के उच्च अधिकारियों को आमने-सामने एक साथ बैठाकर समस्याओं का निराकरण कराना था, क्योंकि अलग-अलग बैठक करने पर समस्याओं के संबंध में पूरी तस्वीर सामने नहीं आती है.

उन्होंने कहा कि सभी कुलपति विश्वविद्यालय में नियमित रूप से बैठें तथा छात्र-छात्राओं से नियमित रूप से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान निकालें. छात्रों के बीच कुलपति को अपनी ऐसी आभा बनानी चाहिए, जिससे छात्रों को लगे कि कुलपति छात्रों एवं विश्वविद्यालय के हित में कार्य कर रहे हैं. बैठक के बारे में दिये गये दिशा निर्देशों के क्रम में विश्वविद्यालय में तीन माह के अन्दर क्या-क्या कार्य किए गये हैं, उसकी प्रगति रिपोर्ट कुलपति भेजेंगे.

राज्यपाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर केन्द्र व राज्य सरकार के दिशा निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ स्वीकृत पदों पर नियमित नियुक्ति करें. नियुक्ति के संबंध में राजभवन को कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं होनी चाहिए. उन्होंने निर्देश दिये कि सभी कुलपति नियुक्ति संबंधी साक्षात्कार की पूरी रिकार्डिंग करायेंगे और उसे सुरक्षित रखेंगे. रिक्त नियमित पदों एवं सेवानिवृत्ति से रिक्त होने वाले पदों पर राज्य सरकार द्वारा भर्ती पर कोई रोक नहीं है.

उन्होने स्पष्ट कहा कि स्वायत्तता का मतलब मनमानी नहीं होता है, ऐसी स्थिति में कोई कुलपति ऐसा कोई कार्य न करे जो नियमों की परिधि के बाहर हो. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में चल रहे निर्माण कार्यों को समय सीमा के अन्तर्गत पूरा करें, जिससे उसकी लागत में वृद्धि न हो.

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