यूपी: आठ महीने में मनरेगा का 40% बजट खर्च, काम सिर्फ 5%

विभाग ने 24 कार्यो की शुरुआत की है जिसमें बंधी बांधना, चेकडैम बनाना, वृक्षो कों लगाना आदि कई काम प्रस्ताव में शामिल किये गये है।

हमीरपुर: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में मनरेगा कनवरजेंस में वन विभाग ने बजट की 40 फीसदी धनराशि खर्च कर ली है मगर आठ माह व्यतीत हो जाने के बावजूद लक्ष्य से पांच फीसदी काम हो पाया है। विभाग द्वारा प्रस्तावित 73 कार्यो में 49 की तो शुरुआत नहीं हुई है।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) के परियोजना निदेशक (पीडी) चित्रसेन सिंह ने बताया कि वन विभाग ने मनरेगा में 73 कामो का प्रस्ताव दिया था और श्रमांश में 360.65 लाख और सामग्री में 65.51 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इसके लिये शासन ने 1,96,729 मानव दिवस सृजन करने का लक्ष्य रखा था यानी इतने दिन काम बजट के अनुसार कराना है ताकि स्थानीय मजदूरो को मनरेगा के जरिये लाभ मिल सके।

24 कार्यो की शुरुआत के बाद भी मजदूरो को नही मिल पा रहा काम

विभाग ने 24 कार्यो की शुरुआत की है जिसमें बंधी बांधना, चेकडैम बनाना, वृक्षो कों लगाना आदि कई काम प्रस्ताव में शामिल किये गये है। पीडी ने बताया कि विभाग ने कई काम ऐसे काम शामिल किये है जो पहले कराये जा चुके है। शासन के आदेश है कि सभी काम की शुरुआत की जाये मगर विभाग ने 49 कामो की शुरुआत नहीं की है जिससे मजदूरो को काम नही मिल पा रहा है।

मनरेगा बजट से 80.25 लाख खर्च पर काम न के बराबर 

वनाधिकारी नरेंद्र सिंह का कहना है कि धीरे-धीरे कामो की शुरूआत की जा रही है। विभाग ने 80.25 लाख रुपये खर्च कर दिये है मगर मानव दिवस यानी कामो की संख्या बहुत ही कम हुयी है। इसी प्रकार विभाग ने सामग्री में 65.51 लाख खर्च करना था मगर इस मद में एक भी धेला नही खर्च किया गया है जिससे विभाग की कार्यप्रणाली में प्रश्नचिन्ह लगता जा रहा है।

विभाग ने दावा किया है कि अभी तक कुल मिलाकर 250 श्रमिकों को काम मे लगाया गया है जबकि रोजाना एक हजार से अधिक श्रमिको को काम मे लग जाना चाहिये मगर ऐसा नही हो रहा है जिससे मजदूर इधर उधर भटकने को मजबूर है। श्रमिको को काम न मिल पाने के कारण श्रमिक लगातार गैर प्रांतों को पलायन करते जा रहे है।

इस मामले की समीक्षा की जायेगी- सीडीओ

सीडीओ कमलेश कुमार वैश्य का कहना है कि इस मामले की समीक्षा की जायेगी और ज्यादा से ज्यादा मजदूरो्ं को काम देने के लिये बन विभाग को कहा जायेगा। भारतीय किसान यूनियन केक जिलाध्यक्ष निरंजन सिंह राजपूत का कहना है कि श्रमिक रोजाना विभागु के चक्कर लगाते रहते है मगर कोई काम नही मिल पा रहा है जिससे लोग परेशान है।

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