गोवंश एवं पशुपालन के उन्नयन पर निरन्तर कार्य कर रही यूपी सरकार

लखनऊ: भारतीय संस्कृति में गाय का विशेष महत्व है यही कारण है कि गाय को माता का दर्जा प्रदान किया गया है। ऐसी मान्यता है कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास है व गाय की सेवा करने वाला व्यक्ति पुण्य का भागीदार बनता है। ऋग्वेद में गाय को अधन्या बताया गया है वहीं यजुर्वेद कहता है कि गौ अनुपमेय है इसके साथ ही अगर अथर्ववेद की बात करें तो अथर्ववेद में गाय को सम्पत्तियों का घर कहा गया है।

गरूड़ पुराण में वैतरणी पार करने के लिए गौ दान का महत्व बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार ’गौ सर्वदेवमयी और वेद सर्वगौमय है।’ भगवान कृष्ण ने श्रीमद् भगवतगीता में कहा है- ’धेनुनामस्मि कामधेनु’ अर्थात मैं गायों में कामधेनु हूॅ।

गोवंश के संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाएं हैं। प्रदेश के सभी जनपदों में 2-2 वृहद गोवंश संरक्षण केन्द्र की स्थापना की है इस हेतु 278 केन्द्रों के लिए 303.60 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए हैं। लोग अक्सर दूध न देने वाली गोपशुओं को बेसहारा छोड़ देते हैं प्रदेश सरकार ऐसे पशुओं का खास खयाल रख रही है। मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता कार्यक्रम में 51772 गोपालकों को 94626 गोवंश सुपुर्द किए गए इसके अलावा बेसहारा निराश्रित गोवंशीय पशुओं के भरण-पोषण हेतु कार्पस फण्ड का सृजन किया गया है।

प्रदेश में 4503 अस्थायी गो आश्रय स्थल 177 कान्हा गोशाला, 408 कांजी हाएस व 189 वृहद गोवंश संरक्षण केन्द्रों में कुल 6.08 गोवंश संरक्षित किए गए है। बुन्देलखण्ड के 7 जनपदों में 35 पशु आश्रय गृहों का निर्माण किया गया है। शहरी क्षेत्र में भी गोवंश के संरक्षण की अभूतपूर्व व्यवस्था की गई है इसके लिए 16 नगर निगमों में गोशाला के सुदृढ़ीकरण हेतु रू0 17.52 करोड़ निर्गत किए गए हैं।

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