यूपी: बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सरकार एम्बुलेंस की तादाद बढ़ाने पर दे जोर

राजधानी हो या फिर प्रदेश के अन्य शहर एम्बुलेंस की कमी लगभग हर जगह है।

एम्बुलेंस
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लखनऊ: प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था का आलम ये है कि अगर कोई मरीज अचानक से बीमार पड़ जाए और उसे एम्बुलेंस की जरूरत पड़ जाए, तो ऐसे में या तो मरीज को काफी लम्बे वक़्त का इंतज़ार करना पड़ता है, या फिर खुद के साधन से अस्पताल तक का रास्ता तय करना पड़ता है।

योगी सरकार भले ही स्वास्थ्य व्यवस्था पर अपना पीठ थपथपा ले, लेकिन असलियत तो कुछ और ही है। कई बार ऐसा होता है कि एम्बुलेंस काफी लंबी दूरी तय करने के बाद मरीज तक पहुंच पाते है। मतलब साफ़ है लोकल स्तर पर आज भी एम्बुलेंस सेवा पूरी तरीके से जीवंत नहीं है।

राजधानी हो या फिर प्रदेश के अन्य शहर एम्बुलेंस की कमी लगभग हर जगह है। कई बार तो साफ़ देखा जा सकता है, कि बिना मरीज के (खाली) एम्बुलेंस आपके बगल से इतना तेजी से गुजरते है कि आप हिल जाते है। स्वास्थ्य विभाग की कमियों का खामियाजा एम्बुलेंस ड्राइवर को भुगतना पड़ता है। इतने सीमित संसाधन है की एम्बुलेंस ड्राइवर को जल्द मरीज को अस्पताल तक छोड़कर दूसरे मरीज तक पहुंचना रहता है।

सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। एम्बुलेंस की तादाद बढ़ने के बाद ही इस समस्या का समाधान हो सकता है।

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