कांवड़ यात्रा को लेकर UP-उत्तराखंड आमने-सामने, बॉर्डर पर फोर्स तैनात

लखनऊ: कांवड़ यात्रा को लेकर UP और उत्तराखंड सरकार आमने सामने आ गयी है। कारण ये है की उत्तराखण्ड की धामी सरकार ने इस वर्ष होने वाली कांवड़ यात्रा को रद्द कर दिया है तो वहीँ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यात्रा की मंजूरी दे दी है। बता दें कांवड़ यात्रा में उत्तराखंड मुख्य रूप से मेजबान प्रदेश की भूमिका निभाता है, जबकि यात्री मुख्य रूप से यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान जैसे प्रदेशों से आते हैं। वही UP में कांवड़ यात्रा को शर्तों के साथ अनुमति मिल चुकी हैं।

बीते दिनों उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी और यूनियन होम मिनिस्टर अमित शाह से मुलाकात कर कांवड़ यात्रा के संबंध में बात चीत की थी। प्रदेश सरकार की ओर से यात्रा के रद्द होने के संकेत मिलने के बाद कांवड पटरी मार्ग पर बिजली, पानी, शौचालय और साफ सफाई के काम भी नहीं कराए गए थे। इसके साथ ही यात्रा के लिए अलग से बजट भी जारी नहीं किया है। वहीँ हरिद्वार के बाजार में भी कांवड यात्रा को लेकर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही थी।

बॉर्डर पर होगी मुश्किल

वहीँ कांवड पर दोनों राज्यों का अलग- अलग रुख होने के कारण UP- उत्तराखंड बॉर्डर पर टकराव के हालात भी पैदा हो सकते हैं। पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि यदि उत्तर प्रदेश की ओर से कावड़ यात्रियों की भीड़ सीमा पर आई तो उन्हें काबू में करना नामुमकिन होगा। यहां तक की RTPCR जांच, प्री रजिस्ट्रेशन, मास्क, सोशल डिस्टेंस का पालन जैसी कोविड से सम्बंधित कवायद भी भीड़ के आगे संभव नहीं हो पाएगी। इस कारण इस विषय पर दोनों राज्यों के बीच तालमेल जरूरी है।

वहीँ कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि हमारी प्राथमिकता जन स्वास्थ्य की है। हम किसी भी कीमत पर जान-माल की हानि नहीं होने देंगे। भगवान भी नहीं चाहेंगे कि आस्था के नाम पर किसी का नुकसान हो। बाकी अन्य राज्यों के साथ उच्च स्तर पर भी विचार- विमर्श किया जा रहा है।

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