किसान विधेयक पर संसद से सड़क तक हंगामा

 हरसिमरत कौर बादल
हरसिमरत कौर बादल

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा संसद में जैसे ही किसानों से जुड़े दो विधेयक का जिक्र शुरू हुआ संसद की दीवारे हंगामें से गूँज उठी. विपक्ष और भाजपा के साथी दल इस विधेयक का विरोध करने लगे. आक्रोश इतना बढ़ गया कि बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल की नेता और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि किसान विरोधी अध्यादेश का विरोध करते हुए मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. मुझे गर्व है की मै हमेशा किसानों के साथ उनकी बहन, बेटी बनकर खड़ी रही. इससे पहले सिरोमणि अकाली दल के सांसद सुखबीर सिंह बादल ने संसद में इस बिल का विरोध करते हुए ये एलान कर दिया था कि हरसिमरत कौर बादल अपने पद से इस्तीफा देंगी.

विरोध के तीन बिल- http://loksabhahindiph.nic.in/Legislation/billintroduce.aspx
  • पहला बिल- कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल
  • दूसरा बिल- मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (संरक्षण एवं सशक्तिकरण बिल)
  • तीसरा बिल- आवश्यक वस्तु संशोधन बिल
विरोध की असल वजह (विपक्ष का तर्क)

सड़क से लेकर संसद तक मचे हंगामे की असल वजह है न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी (एमएसपी). किसानों और विपक्ष के नेताओं का मानना है की इन विधेयकों से सरकार बहुत आसानी से न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रक्रिया को ख़त्म करने की तैयारी कर रही है. इसके बाद बड़ी कम्पनियां गरीब किसानों का शोषण करने के लिए पूरी तरीके से आजाद हो जाएंगी.

सरकार का तर्क

विधेयक के बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार इसे किसान हितकारी बताने में जुट गई है. कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने इस विधेयक को किसान हित में बताते हुए कहा की ये किसानों के लिए भविष्य में बेहद लाभकारी साबित होगा.

प्रधानमन्त्री भी मैदान में

विधेयकों पर मचे बवाल के बीच देश के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा की लोकसभा में विधेयकों का पारित होना देश के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पल है, इस बिल के पास होने के बाद किसानों को तमाम बिचौलियों और अवरोधों से मुक्ति मिल जाएगी. किसानों को नए-नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा पहले से कही ज्यादा बढ़ जायेगा. उन्होंने विपक्ष के विरोध पर बोलते हुए कहा कि कुछ लोग किसान भाइयों को भड़काने में पूरी ताकत से लगे हुए है, लेकिन मै किसान भाइयों और बहनों को आश्वस्त करना चाहता हूं की न ही एमएसपी को बंद किया जायेगा और न ही सरकारी खरीद, ये दोनों ही व्यवस्था पहले की तरह किसानों के लिए बनी रहेंगी.

संसद से सड़क तक के इस घमासान में सरकार और किसान कहीं आमने सामने तो नहीं हो गए है. भाजपा के सहयोगी पार्टी सिरोमणि अकाली दल द्वारा जारी विरोध कही आपसी फूंट का एक उदाहरण तो नहीं, फिलहाल बवाल सड़क पर है और सरकार के प्रतिनिधि इसे शांत करने के लिए हर पैंतरे का इस्तेंमाल करने में लग गए है.

 

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