यूपी में श्रम कानून में बदलाव पर मचा हंगामा, अखिलेश-प्रियंका ने खोला मोर्चा

नई दिल्‍ली: यूपी में श्रम कानून में बदलाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। योगी सरकार के अध्यादेश पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके सरकार को घेरा है। अध्यादेश में करार के साथ नौकरी करने वाले लोगों को हटाने, नौकरी के दौरान हादसे का शिकार होने और समय पर वेतन देने जैसे तीन नियमों को छोड़कर अन्य सभी श्रम कानूनों को तीन साल के लिए स्थगित कर दिया गया है।

यूपी सरकार के यह नियम मौजूद सभी राज्य और केंद्रीय इकाइयों पर लागू होंगे। इसके दायरे में 15000 कारखाने और लगभग 8 हज़ार मैन्युफैक्चरिंग यूनिट आएंगी। श्रम विभाग में 40 से अधिक प्रकार के श्रम कानून हैं। अध्यादेश के तहत इनमें से लगभग आठ को बरकरार रखा जा रहा है, जिनमें 1976 का बंधुआ मजदूर अधिनियम, 1923 का कर्मचारी मुआवजा अधिनियम और 1966 का अन्य निमार्ण श्रमिक अधिनियम शामिल है। इसको लेकर अब कांग्रेस और सपा दोनों ही योगी सरकार पर हमलावर हो गई है।

प्रियंका गांधी ने ट्वीट में लिखा, ”यूपी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। आप मजदूरों की मदद करने के लिए तैयार नहीं हो। आप उनके परिवार को कोई सुरक्षा कवच नहीं दे रहे। अब आप उनके अधिकारों को कुचलने के लिए कानून बना रहे हो। मजदूर देश निर्माता हैं, आपके बंधक नहीं हैं।”

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और एसपी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ने भी अध्यादेश पर सवाल उठाए हैं। यहां तक कि उन्होंने यूपी सरकार से इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने ट्वीट किया है कि उप्र की भाजपा सरकार ने एक अध्यादेश के द्वारा मज़दूरों को शोषण से बचाने वाले ‘श्रम-क़ानून’ के अधिकांश प्रावधानों को 3 साल के लिए स्थगित कर दिया है। ये बेहद आपत्तिजनक व अमानवीय है। श्रमिकों को संरक्षण न दे पाने वाली ग़रीब विरोधी भाजपा सरकार को तुरंत त्यागपत्र दे देना चाहिए।

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