उत्तर प्रदेशः दो साल में तैयार हो जाएंगे तीन सौ नए पर्यटन स्थल

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लखनऊ: प्रदेश में आगामी दो साल में तीन सौ नए पर्यटन स्थल तैयार हो जाएंगे। मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत पर्यटन विभाग को करीब 400 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक पर्यटन स्थल विकसित करने का प्रस्ताव मिल गया है। योजना को कैबिनेट से मंजूरी के बाद पर्यटन विभाग ने प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू की है।

योजना के तहत विधानसभा क्षेत्रों में स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राचीन सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब सभी 75 जिलों से जिलाधिकारियों ने विधानसभा क्षेत्रों में पर्यटन स्थल का चयन कर प्रस्ताव भेज दिया है।

पर्यटन विभाग की ओर से अब डीपीआर बनवाई जाएगी। डीपीआर बनने के बाद उसे प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी की जाएगी। चयनित स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए वहां चारदीवारी निर्माण, बेंचों का निर्माण, साइनेज, पेयजल, स्टोर रूम, लॉकर, जूताघर, चबूतरा, रेलिंग, फेंसिंग, पाथ-वे, इंटरलॉकिंग टाइल्स कार्य कराए जाएंगे। स्थल के सौंदर्यीकरण, पार्किंग की व्यवस्था, गेट, प्रकाश व्यवस्था, इंडिया मार्का हैंडपंप, सुलभ प्रसाधन, संपर्क मार्ग के कार्य भी कराए जाएंगे।

हर विधानसभा क्षेत्र में एक पर्यटन स्थल के विकास के लिए पचास लाख रुपये प्रदेश सरकार देगी। शेष राशि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के विधायक की विधायक निधि और जिले में स्थित कंपनियों, उद्योगों के सीएसआर फंड से ली जाएगी। एक पर्यटन स्थल को विकसित करने में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होंगे।

मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना में केवल विधायकों को शामिल किया है। विधान परिषद सदस्यों को योजना में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में सरकार के दोनों उप मुख्यमंत्री, कुछ मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जो विधान परिषद सदस्य हैं वे अपने जिले या क्षेत्र के लिए योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।

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