उत्तराखंड ग्लेशियर त्रासदी Update: ‘प्रकृति को न समझने की भूल’, ऋषिगंगा नदी का जलस्तर बढ़ा

चमोली जिले के ऋषिगंगा में जलस्तर बढ़ जाने से चल रहे बचाव कार्य को रोक दिया गया है और इलाके में अलर्ट जारी किया गया है

उत्तराखंड: उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली में जोशीमठ के मठ के पास तपोवन इलाके में 7 फरवरी को ग्लेशियर फटने से राज्य में तबाही मची हुई है। चमोली जिले के ऋषिगंगा में जलस्तर बढ़ जाने से चल रहे बचाव कार्य को रोक दिया गया है और इलाके में अलर्ट जारी किया गया है।

सुरंग में बचाव कार्य

तपोवन सुरंग में बचाव कार्य पर गढ़वाल DIG नीरू गर्ग ने बताया कि सब यही कोशिश कर रहे हैं कि हम आगे से आगे पहुंच पाएं। पहले गति अच्छी थी, परन्तु अब तरल ज्यादा हो गया है, जितना हम साफ कर रहे हैं अंदर से उतना ज्यादा तरल निकल रहा है। प्रयास जारी है, उम्मीद है कि 180 मीटर के आसपास वो लोग मिल जाएं।

 

रैनी गांव के पास अलर्ट जारी

उत्तराखंड के चमोली जिले के ऋषिगंगा में जलस्तर बढ़ जाने से चल रहे बचाव कार्य को रोक दिया गया है। रैनी गांव के पास अलर्ट जारी किया गया है। चमोली पुलिस ने स्थानीय लोगों से कहा कि ऋषिगंगा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट किया जा रहा है। लोगों से निवेदन है कि वे घबराएं नहीं अलर्ट रहें।

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प्रकृति को न समझने की भूल

पर्यावरणविद (Environmentalist) डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि यह मात्र उत्तराखंड के लिए संकेत नहीं है बल्कि पूरे देश का सवाल है। हम प्रकृति के विज्ञान को न मानते हैं न समझते हैं। यह प्रकृति को न समझने की भूल है। सवाल सरकारों से है कि केदारनाथ और इस घटना के बाद हमने क्या सबक लिया। इसकी समीक्षा होनी चाहिए।

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने चमोली जिले के तपोवन का दौरा किया। राज्यपाल ने कहा, ‘हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में हैं। यह प्राकृतिक आपदा है जो किसी के वश में नहीं है। ईश्वर से प्रार्थना है कि अंदर फंसे लोग जल्दी बाहर आएं’।

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