कोविड वेरिएंट के चलते Uttarakhand सरकार ने रद्द की कांवड़ यात्रा

उत्तराखंड सरकार ने कोविड महामारी के चलते इस साल होने वाली कांवड़ यात्रा को रद्द कर दिया है

देहरादून: कोविड महामारी की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए उत्तराखंड (Uttarakhand) की पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने इस साल होने वाली ‘कांवड़ यात्रा’ (Kanwar Yatra) को रद्द कर दिया है। कोरोना महामारी के चलते पिछले साल भी कांवड़ यात्रा संचालित नहीं हो सकी थी। हालांकि यूपी में कावड़ यात्रा 25 तारीख से जारी रहेगा।

उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमने उच्च अधिकारियों के साथ कांवड़ यात्रा के संदर्भ में बातचीत की। ऐसे समय में जब कोविड वेरिएंट प्रदेश में मिला है। इस स्थिति में हम हरिद्वार को कोरोना महामारी का केंद्र नहीं बनाना चाहते इसलिए हमने कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का फैसला किया है।

कांवड़ लेकर पदयात्रा

हर साल सावन महीने में लाखों की तादाद में कांवड़िये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्रा को कांवड़ यात्रा बोला जाता है। लकड़ी से निर्मित मंदिरनुमा आकृति को ‘कावड़’ कहा जाता है। जब कावड़ में मूर्ति स्थापित की जाती है तब इसे ‘बेवाण’ कहा जाता है। चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव का अभिषेक किया जाता है।

कहने को तो ये धार्मिक आयोजन भर है, लेकिन इसके सामाजिक सरोकार भी हैं। कांवड के माध्यम से जल की यात्रा का यह पर्व सृष्टि रूपी शिव की आराधना के लिए हैं। पानी आम आदमी के साथ साथ पेड़ पौधों, पशु-पक्षियों, धरती में निवास करने वाले हजारो लाखों तरह के कीड़े-मकोड़ो और समूचे पर्यावरण के लिए बेहद आवश्यक वस्तु है। उत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति को देखें तो यहां के मैदानी इलाकों में मानव जीवन नदियों पर ही आश्रित है। नदियों से दूर-दराज रहने वाले लोगों को पानी का संचय करके रखना पड़ता है। हालांकि मानसून (Monsoon) काफी हद तक इनकी आवश्यकता की पूर्ति कर देता है।

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