उत्तराखंड सरकार की ‘अतिक्रमण याचिका’ SC में खारिज, कहा- जहां से मिले निर्देश, वहीं करें अपील

0

देहरादून। हाईकोर्ट के फरमान पर यहां जो अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू हुआ, उसे कुछ दिनों के लिए रोकने को उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी। इस अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अतिक्रमण हाटने की समयसीमा बढ़वाने के लिए डाली गई याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस अभियान के लिए निर्देश नैनीताल हाईकोर्ट ने दिए हैं। उस आदेश को कुछ दिनों के लिए रुकवाने के लिए उत्तराखंड सरकार वहीं अपील करें।

बसपा नेता पर गिरी भाजपा से मोहब्बत करने की गाज

सुप्रीम कोर्ट से अपील

खबरों के मुताबिक़ याचिका में कहा गया था कि इन दिनों अधिकारी और कर्मचारी आपदा प्रभावित कार्यों में व्यस्त हैं। वहीं, बारिश के चलते अतिक्रमण हटाओ अभियान में आम जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए दी गई चार सप्ताह की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने दून निवासी मनमोहन लखेड़ा के वर्ष 2013 में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा था। जिसे जनहित याचिका के रूप में लेते हुए हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।

कूड़े के ढेर में मिला बच्ची का पूर्ण विकसित भ्रूण, मचा…

खंडपीठ ने मुख्य सचिव को चार सप्ताह में देहरादून की सड़कों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। साथ ही उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा, जिनके कार्यकाल के दौरान अतिक्रमण हुआ है।

कोर्ट ने आदेश में कहा था कि यदि तय समय में अतिक्रमण नहीं हटता है तो इसके लिए मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। साथ ही तीन महीने में रिस्पना नदी के किनारे से अतिक्रमण हटाकर नदी को पुनर्जीवित करने को कहा था। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के लिए पूरी ताकत झोंकने और जरूरत पड़ने पर धारा 144 लगाने को कहा।

इसके अलावा सरकार, एमडीडीए और नगर निगम को निर्देश दिए कि वो तीन सप्ताह के भीतर ऐसे मॉल, शोरूमों को सील करें, जिनके बेसमेंट पार्किंग के स्वीकृत हैं, लेकिन जगह का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। वहीं, आवासीय भवनों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान मिलने पर उन्हें भी सील करने के आदेश दिए थे।

बता दें अतिक्रमण के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश की समयसीमा बढ़वाने के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसमें प्रदेश में भारी बारिश के चलते हो रही समस्याओं से अवगत कराया गया था।

loading...
शेयर करें