उत्तराखंड यूनिवर्सिटी एक्ट बनने से उच्च शिक्षा और सुधरेगी

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देहरादून। उत्तराखंड विश्वविद्यालय अधिनियम (यूनिवर्सिटी एक्ट) जल्द ही अस्तित्व में आने जा रहा है। उत्तराखंड उच्च शिक्षा परिषद को इसका ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। प्रदेश में अभी तक उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम ही चला आ रहा है। राज्य की विशेष भौगोलिक परिस्थिति और जरूरतों को देखते हुए अपने विश्वविद्यालय अधिनियम की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

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उत्तर प्रदेश में 1973 में विश्वविद्यालय अधिनियम बना था। 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बना तो अपना अधिनियम बनने तक यूपी के अधिनियम को ही जारी रखा गया। वर्ष 2007-08 में उत्तराखंड विश्वविद्यालय अधिनियम बनाने की बात जोरों पर चली थी, उस दौरान इसका खाका भी तैयार कर लिया गया था लेकिन किन्हीं कारणों से मामला अटक गया। तब से आज तक किसी ने भी अधिनियम बनाने की सुध नहीं ली और इस दिशा में कोई पहल भी नहीं की। हाल ही में उच्च शिक्षा परिषद की बैठक में कई सदस्यों ने इस मामले को उच्च शिक्षा मंत्री इंदिरा ह्दयेश के सामने उठाया। जिसके बाद ऩये सिरे से इस अधिनियम के लिये कवायदें शुरु हो गयी हैं।

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विश्वविद्यालय अधिनियम के फायदे

विभागीय मंत्री इंदिरा ह्दयेश ने उच्च शिक्षा परिषद को उत्तराखंड विश्वविद्यालय अधिनियम का ड्राफ्ट तैयार करने का काम सौंपा है। उन्होंने कहा कि अपना अधिनियम बनाने में कहीं कोई बाधा नहीं है। उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और जरूरतें यूपी से काफी भिन्न हैं। अपना अधिनियम बनाते समय कालेजों की संबद्धता, विद्या परिषद और कार्य परिषद का स्वरूप और उच्च शिक्षण संस्थानों में विभागों की संरचना आदि यहां की सहूलियत के मुताबिक ही होंगी। प्रदेश सरकार के लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रावधान भी इस अधिनियम में होंगे। खास बात ये भी है कि जब तक प्रदेश के पास अपना अधिनियम नहीं है, तब तक परिनियमावली भी नहीं बना सकते। अपना अधिनियम बनने के बाद परिनियमावली बनाना भी आसान हो जायेगा।

 

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