सहिष्‍णुता पर कांग्रेस से अलग है उनके इस नेता की राय

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सहिष्णुता व सद्भाव भारत की परम्परा व संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। भारतीय इतिहास साक्षी है कि जिन शासकों ने सभी धर्मों, जातियों के प्रति समान व्यवहार रखा और प्रेम व सद्भाव को अपनी नीति बनाया उन्हें महान माना गया है।

रविवार को नोएडा स्थित इंदिरा कला केंद्र में आयोजित 7वें पाखी महोत्सव के अवसर पर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व असहिष्णुता’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में बोलते हुए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि विभिन्नताओं वाले भारत देश में वही शासक सफलतापूर्वक शासन कर सकता है जो नीति व व्यवहार में सहिष्णु होता है।

जब तक अशोक ने तलवार से विजय की नीति अपनाई तब तक उसे सम्राट माना गया परंतु महान तभी कहा गया जब अहिंसा व प्रेम उसकी नीति का महत्वपूर्ण अंग हो गया। औरंगजेब विद्वान और धर्मपरायाण शासक था परंतु महान अकबर को कहा गया क्योंकि उनकी राजनीति सहिष्णुता पर आधारित थी।

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