अपने ही राज्य में एडमिशन नहीं पा रहे उत्तराखंड के छात्र, नीट काउंसलिंग पर बाहरी स्टूडेंट्स का कब्ज़ा

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देहरादून। उत्तराखंड में इस बार MBBS और BDS की स्टेट काउंसिलिंग को लेकर कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। बेशक इस बार नीट का रिजल्ट अच्छा आया हो लेकिन उत्तराखंड के होनहार स्टूडेंट्स के साथ इस बार कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। नीट की स्टेट काउंसिलिंग को लेकर अभी भी कई स्टूडेंट्स असमंजस में हैं कि आखिर वो करें तो क्या करें।

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नीट का एग्जाम 7 मई को देशभर के 1921 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित किया गया था। देशभर में MBBS की 65 हजार और BDS की 25 हजार सीटों के लिए हुए नीट एग्जाम में इस वर्ष कुल 11 लाख 38 हजार 890 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। इसमें 1522 एनआरआई और 613 विदेशी स्टू़डेंट शामिल हुए थे।

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नीट की स्टेट काउंसिलिंग में उत्तराखंड के स्टूडेंट्स को नहीं मिल रहा एडमिशन

मगर नीट की स्टेट काउंसिलिंग उत्तराखंड के होनहार स्टूडेंट्स के लिए परेशानी का सबब बन गई है। दरअसल, इस बार राज्य के स्टूडेंट्स को अपने ही प्रदेश में एडमिशन नहीं मिल पा रहा है। पूरे देश में एक ही नीट परीक्षा होने के कारण उत्तराखंड के बजाय बाहरी राज्यों के होनहारों ने ज्यादा सीटों पर कब्जा कर लिया है।

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उत्तराखंड के स्टूडेंट्स को हो रही है परेशानी

ऐसे में अब राज्य के स्टूडेंट्स को परेशानी हो रही है कि आखिर वो जाएं तो कहां जाएं। वहीं, हाल ही में जारी हुई एक मेरिट लिस्ट के अनुसार, टॉप-500 में राज्य के सिर्फ 158 स्टूडेंट्स को ही एडमिशन मिल पाया है। ये मेरिट लिस्ट तो सिर्फ एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी की हुई है।

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ऐसे ही राज्य में और भी कई कॉलेज हैं, जिनमें बाहरी राज्य के स्टूडेंट्स को ज्यादा दाखिले मिले हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि जो स्टूडेंट्स दूसरे स्टेट्स के हैं उनके नंबर और रैंक राज्य के स्टूडेंट्स के मुकाबले ज्यादा अच्छे हैं। इस लिहाज से प्रदेश के अधिकतर प्राइवेट कॉलेजों में बाहरी राज्य के स्टूडेंट्स का दबदबा ज्यादा है।

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