9 लोगों के लिए आपदा बनी अवसर, Vaccine से बने अरबपति, कमाए अरबों रुपए

न्यूयॉर्क: एक विदेशी न्यूज़ एजेंसी के हवाले से सामने आई ये खबर आपको दांतों तले ऊँगली दबाने पर मजबूर कर देगी. कोरोना महामारी के इस दौर ने जहाँ एक तरफ करोड़ों लोगों की कमर तोड़ी है वहीँ चंद लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए ये आपदा अवसर बनकर सामने आई है. ऐसा हम नहीं कह रहे ऐसा US की People’s Vaccine Alliance ​का कहना है. इस आपदा में सबसे जादा मुनाफा कमाने वाले सेनिटाइजर्स, फेस मास्क समेत दवा बनाने वाले हैं. इस दौरान सबसे ज्यादा फायेदा किसी का हुआ है तो वो कोरोना वैक्सीन बनाने वाले हैं. पीपुल्स वैक्सीन एलायंस मुताबिक कोविड-19 वैक्सीन से हुए मुनाफे ने कम से कम 9 लोगों की अरबपति बनने में मदद की है. न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक यह दावा इस कैंपेन ग्रुप ने किया है. समूह ने इसके साथ ही वैक्सीन प्रौद्योगिकी पर फार्मास्युटिकल्स कॉरपोरेशंस के एकाधिकार नियंत्रण को समाप्त करने का आह्वान भी किया है.

कमाए इतने रुपए

People’s Vaccine Alliance ने एक बयान में कहा है कि Corona Virus रोधी वैक्सीन की वजह से जो 9 लोग अरबपति क्लब में शामिल हुए, उनकी कुल मिलाकर दौलत 19.3 अरब डॉलर (15.8 अरब यूरो) है. इस मुद्रा को अगर भारतीय मुद्रा में देखें तो यह आंकड़ा लगभग 1411.22 अरब रुपये बैठता है. People’s Vaccine Alliance का यह भी कहना है कि यह दौलत कम आय वाले देशों में सभी लोगों को 1.3 बार पूरी तरह से Vaccination करने के लिए पर्याप्त है.People’s Vaccine Alliance कहना है कि ये आंकड़े Forbes Rich List के डाटा पर आधारित हैं.

ये 9 नए अरबपति हैं

अलायंस का हिस्सा Oxfam Charity की Ana Marriott का कहना है कि ये 9 नए अरबपति उस बड़े मुनाफे का मानवीय चेहरा हैं, जो कई फार्मा कॉरपोरेशंस कोविड-19 टीके पर अपने एकाधिकार के जरिए कमा रही हैं. वैक्सीन से अरबपति बने नए लोगों की लिस्ट में टॉप पर मॉडर्ना के सीईओ स्टीफेन बेंसल और बॉयोएनटेक के सीईओ उगर साहिन हैं. अन्य तीन तीन नए अरबपतियों में चीन की वैक्सीन कंपनी कैंसिनो बॉयोलॉजिक्स के सह-संस्थापक शामिल हैं.

कल होने वाला है G-20 ग्लोबल हेल्थ समिट

यह रिसर्च उस वक्त सामने आई है, जब शुक्रवार को G-20 ग्लोबल Health summit होने जा रहा है. इस सम्मेलन में Corona Vaccine पर से Intellectual Property Protection ​को अस्थायी तौर पर हटाए जाने की मांगों पर चर्चा हो सकती है. यह मांग उठाने वालों का कहना है कि इससे विकासशील देशों में वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा.

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