देशभर को हिला कर रख दिया था मौत के संदर्भ में वाजपेयी का अटल भाषण

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हिन्दी कवि, पत्रकार व प्रखर वक्ता भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपनी बेहद संजीदा हालत की वजह काफी समय पहले से एम्स में एड्मिट हैं। इधर उनकी हालत और भी बिगड़ गई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी समेत कई राजनेता अबतक वाजपेयी को देखने हॉस्पिटल पहुँच चुके हैं।

देशभर को हिला कर रख दिया था मौत के संदर्भ में वाजपेयी का अटल भाषण….

अटल बिहारी वाजपेयी का भाषण…

वाजपेयी हमेशा से अपने भाषण अपनी कविताओं को लेकर जाने जाते रहे हैं। उनके भाषण काफी इंस्पायरिंग होते हैं। लोग उनके भाषण और कविता से काफी प्रभावित होते हैं। मौत को लेकर अटल का भाषण उनही की तरह अटल और गंभीर रहा है। उन्होंने कहा था- ‘मैं मरने से नहीं डरता, डरता हूं तो सिर्फ बदनामी से डरता हूं।’ उनके इस भाषण ने देशभर को हिला कर रख दिया था और यह काफी वायरल भी हो गया था।

उनके भाषण से उनपर कई आरोप भी लागये जाते थे, लेकिन वे अपनी बात पर अडिग रहते हैं। आंतरिक कमजोरी से उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। वे काफी मजबूत, कर्मठता से भरपूर हैं। अपने कर्तव्य के प्रति वे काफी निष्ठावान हैं।

वायपयी पर लगे आरोप…

अटल बिहारी वाजपेयी पर विरोधी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि उनको सत्ता का लोभ है। जिसके बाद उन्होंने लोकसभा में खुलकर बात की थी और सभी को हिलाकर रख दिया था। उन्होंने न सिर्फ विरोधियों को जवाब दिया, बल्कि भगवान राम का दिया हुआ श्लोक पढ़ते हुए कहा था- भगवान राम ने कहा था कि ‘मैं मरने से नहीं डरता, डरता हूं तो सिर्फ बदनामी से डरता हूं।’ जिसके बाद विरोधियों ने कभी उन पर ऐसा आरोप नहीं लगाया।

अटल बिहारी वाजपायी के कार्य…

अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में तीन बार देश का नेतृत्व किया है। वे पहली बार साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी के कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी हैं। भारतीय जनसंघ की स्थापना में भी उनकी अहम भूमिका रही है। वे 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे।

आजीवन राजनीति में सक्रिय रहे अटल बिहारी वजपेयी लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन भी करते रहे हैं। वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित प्रचारक रहे हैं और इसी निष्ठा के कारण उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया था।

कवि के रूप अटल वाजपयी

अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं। मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे।

वे ब्रजभाषा और खड़ी बोली में काव्य रचना करते थे। पारिवारिक वातावरण साहित्यिक एवं काव्यमय होने के कारण उनकी रगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है। उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी। इसमें शृंगार रस के प्रेम प्रसून न चढ़ाकर “एक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल, हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक” की तरह उनका भी ध्यान ताजमहल के कारीगरों के शोषण पर ही गया। वास्तव में कोई भी कवि हृदय कभी कविता से वंचित नहीं रह सकता। राजनीति के साथ-साथ समष्टि एवं राष्ट्र के प्रति उनकी वैयक्तिक संवेदनशीलता आद्योपान्त प्रकट होती ही रही है।

उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी। विख्यात गज़ल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की चुनिंदा कविताओं को संगीतबद्ध करके एक एल्बम भी निकाला था।

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