नहीं होते ‘लौह पुरुष’ तो नहीं होता भारत, 562 टुकड़ों से बनाया हिन्दुस्तान

भारत की असल नीव इस महापुरुष ने ही रखी है। माँ भर्ती के लौह पुरुष के नाम से जाने और पहचाने जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की आज 70वीं पुण्यतिथि है।

नई दिल्ली : आज मैं जिन महापुरुष की बात करने जा रही हूँ उनके नाम से शायद इस देश का बच्चा बच्चा वाकिफ है। आज जिस भारत हम अपना बताते हैं उस भारत की असल नीव इस महापुरुष ने ही रखी है। माँ भर्ती के लौह पुरुष के नाम से जाने और पहचाने जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की आज 70वीं पुण्यतिथि है।

आज इस मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों के बारे में बताएंगे जिन्हे सुनकर आपको इस बात का अंदाज़ा होगा कि सरदार वल्लभभाई पटेल को लौह पुरुष आखिर क्यों कहा गया है? उनके इरादे कितने अटल, शख्सियत कितनी मजबूत और राजनीतिक सूझबूझ सभी के समझ के परे थी।

562 टुकड़ों से बनाया भारत

देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की आज 70वीं पुण्यतिथि है। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा में हुआ था और दिल का दौरा पड़ने से उन्होंने अपनी आखरी सांस मुंबई में 15 दिसंबर 1950 को ली थी। देश की आजादी में सरदार पटेल का जितना योगदान था, उससे कहीं ज्यादा उनका योगदान आजाद भारत को एक करने में था। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ, तब देश में छोटी-बड़ी करीब 562 रियासतें थीं या यूँ कह लें कि आज़ाद भारत के 562 टुकड़े थे।

इनमें से कई रियासतों ने तो आजाद रहने का ही फैसला कर लिया था, लेकिन सरदार पटेल ही थे जिनकी मेहनत और राजनीतिक सूझ बूझ से उन टुकड़ों को एक सम्पूर्ण देश का आकर मिला। उनके कठोर व्यक्तित्व में संगठन कुशलता, राजनीति सत्ता और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट निष्ठा थी जिसके चलते वो एक मज़बूत और समृद्ध भारत बनाने में कामियाब रहे। अपनी इसी सूझबूझ से उन्होंने राजनीतिक पटल पर एक ऐसा अमित स्थान बना लिया था जिसकी बराबरी शायद आज भी कोई नहीं कर सकता है।

बहस पूरी कर ही अपनी स्वर्गीय पत्नी को देखने पहुंचे

गुजरात के नाडियाड जिले में जन्‍में सरदार पटेल की गिनती भारत के सफलतम वकीलों में की जाती थी। जब उनके दो बेटे महज 5 और 3 वर्ष के थे तभी उनकी पत्‍नी का कैंसर की वजह से स्‍वर्गवास हो गया था। वह कोर्ट में बहस कर रहे थे और तभी उन्हें अपनी पत्नी की मौत की खबर मिली. एक व्यक्ति ने बहस कर रहे सरदार को पर्ची पर लिखकर पत्नी के निधन की सूचना दी. उन्होंने पर्ची पढ़ा और मोड़कर जेब में रखते हुए बहस जारी रखी. जब कोर्ट में उनकी बहस पूरी हुई तभी वह अपनी स्वर्गीय पत्नी को देखने पहुंचे.

आजादी की लड़ाई में योगदान

सरदार पटेल गुजरात राज्‍य समेत पूरे देश में शराब से मुक्ति और छुआछूत, जातीवाद और महिला सशक्तिकरण के लिए बढ़-चढ़कर काम किया। उन्‍होंने महात्‍मा गांधी चलाए गए असहयोग आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्‍सा लिया और देशवासियों को खादी पहनने के लिए जागरुक किया।

1947 को जूनागढ भारत में मिला

सौराष्ट्र के करीब स्थित जूनागढ़ भारत की भूमि से घिरी एक छोटी सी रियासत थी। हालांकि भारत की आजादी के बाद यहां के नवाब ने इसका पाकिस्‍तान से विलय करने की घोषणा कर दी थी। आम जनता इसके खिलाफ थी। 15 अगस्त 1947 को जब नवाब ने ये घोषणा की तो नवाब के विरुद्ध लोगों का विरोध भी शुरू हो गया। इसके समर्थन में सरदार ने भारतीय सेना को मैदान में उतार दिया। इससे डरकर नवाज पाकिस्तान भाग गया और 9 नवंबर 1947 को जूनागढ भारत में मिल गया।

हैदराबाद के निजाम से करवाया आत्मसमर्पण

इसी तरह से हैदराबाद के निजाम ने भारत के साथ न मिलने की घोषणा की थी। वो लगातार सैन्‍य क्षमता बढ़ा रहा था। इससे पटेल चिंतित थे। इसको देखते हुए पटेल ने खुद निजाम से भेंट करने की योजना बनाई थी। निजाम से मुलाकात के दौरान पटेल ने साफ कर दिया था कि या तो वो शांतिपूर्ण तरीके से भारत में शामिल हो जाएं नहीं तो भारतीय फौज हैदराबाद में घुसने में कोई देर नहीं लगाएगी। निजाम इससे घब्‍रा गया। उसने आत्मसमर्पण कर दिया। नवंबर 1948 में हैदराबाद भारत में शामिल हो गया।

समाजसेवी सरदार

सरदार केवल एक नेता ही नहीं थे बल्कि समाज सेवी भी थे। जिस क्‍त गुजरात के खेड़ा में प्‍लेग की महामारी फैली थी उस वक्‍त उन्‍होंने इन लोगों की मदद के लिए राहत कार्य चलाया था। बाद में उन्‍होंने अपने वकील के पेशे को पूरी तरह से छोड़ दिया और देश सेवा में जुट गए थे।

पीएम नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी‘ देश को समर्पित की है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का कुल वजन 1700 टन है। इसकी ऊंचाई 240 मीटर है। 1991 में सरदार पटेल को मरणोपरांत देश के सर्वोच्‍च पुरस्‍कार भारत रत्‍न से नवाजा गया था। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने उनके जन्‍म दिन 31 अक्‍टूबर को राष्‍ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था।

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